Monday, January 25, 2016

सजन रे झूठ मत बोलो ! हम अमेरिका के लोग (1787); हम फ़्रांस के लोग (1789); हम जर्मनी के लोग (1949); हम भारत के लोग (1950); हम यहाँ-वहाँ के लोग; असल में वही किस्सा पुराना है --- हर जगह है जेल, अदालत, टैक्स, क़ानून, पुलिस, फ़ौज, नौकरशाही, कॉर्पोरेट, धर्म, देश और पहचान के ठेकेदार, नेता और विकास का दनदनाता राज ! प्रकृति को नष्ट करने और रेगिस्तान बनाने में कोई हिचक नहीं ! सजन रे झूठ मत बोलो !!


   
Gangadin Lohar
January 26 at 1:11am
 
सजन रे झूठ मत बोलो ! हम अमेरिका के लोग (1787); हम फ़्रांस के लोग (1789); हम जर्मनी के लोग (1949); हम भारत के लोग (1950); हम यहाँ-वहाँ के लोग;
असल में वही किस्सा पुराना है ---
हर जगह है जेल, अदालत, टैक्स, क़ानून, पुलिस, फ़ौज, नौकरशाही, कॉर्पोरेट, धर्म, देश और पहचान के ठेकेदार, नेता और विकास का दनदनाता राज ! प्रकृति को नष्ट करने और रेगिस्तान बनाने में कोई हिचक नहीं ! सजन रे झूठ मत बोलो !!

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