गोयबल्स यदि जिन्दा होता तो नरभक्षी काल के भारत को देख आत्महत्या कर लेता. मरने से पहले माता स्मृति के चरणों में तो जरुर अपना शीस अर्पित करता.
संघियों की सबसे बड़ी जायदाद झूठ और मिथ्या प्रचार है, इसे जितना खर्च करते हैं उससे इनकी नग्नता और स्पष्ट नज़र आने लगती है. राष्ट्रीय नग्नता के इतिहास में पिछले १८-२० महीने यादगार रहेंगे.
संघियों की सबसे बड़ी जायदाद झूठ और मिथ्या प्रचार है, इसे जितना खर्च करते हैं उससे इनकी नग्नता और स्पष्ट नज़र आने लगती है. राष्ट्रीय नग्नता के इतिहास में पिछले १८-२० महीने यादगार रहेंगे.
नरेन्द्र दोभालकर, गोविन्द पनसरे, प्रोफ़ेसर कुलबर्गी, अख़लाक़ और अब रोहित जैसी घटनाओं ने संघी आडम्बरों में पलीता लगा दिया है, इसे इतिहास के कूड़ेदान में भेजने का वक्त आ गया है.
पशुपुत्रों का कृदन मरते हुए सांप की अंतिम गर्जना समझी जाए.
पशुपुत्रों का कृदन मरते हुए सांप की अंतिम गर्जना समझी जाए.
नोट : इस पोस्ट को देखकर मुसंघी तत्व हर्षित न हो न मित्रता निवेदन भेजे, हाँ ये जरुर बताएं कि मुसलमानों का चौदवी का चाँद बकरमुंह औवेसी रोहित काण्ड में हैदराबाद का सांसद होते हुए कहाँ खड़ा था? तारीखों के विवरण के साथ, १७ जनवरी को रोहित की आत्महत्या होने के बाद से..
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