Friday, January 22, 2016

गोयबल्स यदि जिन्दा होता तो नरभक्षी काल के भारत को देख आत्महत्या कर लेता. मरने से पहले माता स्मृति के चरणों में तो जरुर अपना शीस अर्पित करता.


गोयबल्स यदि जिन्दा होता तो नरभक्षी काल के भारत को देख आत्महत्या कर लेता. मरने से पहले माता स्मृति के चरणों में तो जरुर अपना शीस अर्पित करता.
संघियों की सबसे बड़ी जायदाद झूठ और मिथ्या प्रचार है, इसे जितना खर्च करते हैं उससे इनकी नग्नता और स्पष्ट नज़र आने लगती है. राष्ट्रीय नग्नता के इतिहास में पिछले १८-२० महीने यादगार रहेंगे.
नरेन्द्र दोभालकर, गोविन्द पनसरे, प्रोफ़ेसर कुलबर्गी, अख़लाक़ और अब रोहित जैसी घटनाओं ने संघी आडम्बरों में पलीता लगा दिया है, इसे इतिहास के कूड़ेदान में भेजने का वक्त आ गया है.
पशुपुत्रों का कृदन मरते हुए सांप की अंतिम गर्जना समझी जाए.
नोट : इस पोस्ट को देखकर मुसंघी तत्व हर्षित न हो न मित्रता निवेदन भेजे, हाँ ये जरुर बताएं कि मुसलमानों का चौदवी का चाँद बकरमुंह औवेसी रोहित काण्ड में हैदराबाद का सांसद होते हुए कहाँ खड़ा था? तारीखों के विवरण के साथ, १७ जनवरी को रोहित की आत्महत्या होने के बाद से..
Comments
Satyendra Ps ओवैसी जी जैसे महान व्यक्तित्व को आप बकरमुंह क्यों कहते हैं !
LikeReply212 hrs
Jayant Khafra स्मृति ईरानी को भान होना चाहिए कि देश चलना, शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सम्भालना किसी सास-बहु सीरियल की तरह नहीं जहां महज़ संवाद बोलना और जब ठीक से न हो सके तो टेक-रिटेक लेते रहना। जब कोई राष्ट्रिय राजनीती में कदम रखता है तो हर वक्तव्य की अपनी अहमियत हो...See More
LikeReply712 hrs
कलीम अव्वल झूठ / भी/ इतना नंगा /और/ तेज़ / कि / अंधे को दिखाई दे /// बहरे को सुनाई दे !!!!!
LikeReply210 hrs
Akhtar Ali ap jaise log saty hi kah sakte hai. kyon ki apka dharm sachchai aur insaniyat ka hai.
LikeReply5 hrs

No comments:

Post a Comment