Tuesday, January 26, 2016

Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna वरिष्ठ और फेंकू पत्रकार वेद प्रताप वैदिक का दावा मित्र सुभाष त्रेहन की पोस्ट पर देख रहा हूँ कि किस तरह उन्होंने 1965 में जे एन यू में हिंदी के समर्थन में क्रान्ति कर दी थी । 1965 में , जब जे एन यू की स्थापना भी नहीं हुयी थी , तब ऐसी क्रान्ति वैदिक ही कर सकते थे । सबको याद होगा , कि किस तरह वैदिक ने कुछ समय पूर्व पाक उग्रवादी हाफ़िज़ सईद के साथ अपना फ़ोटो सोशल मिडिया पर डाल डींग हाँकी थी कि उन्होंने कुख्यात को उग्रवाद छोड़ने की आज्ञा दी । मुझे पूरा विश्वास है कि वैदिक ने उग्रवादी के कान में कहा होगा - दाढ़ी आप पर बहुत फबती है , और इसी बीच सेल्फ़ी ले ली होगी । हाल के वर्षों में एक दिन वैदिक मुझे दिल्ली में मिले , और रहस्योद्घाटन किया - तुम्हारे पिता सूंदर लाल बहुगुणा जब नव भारत टाइम्स के संवाददाता थे , और खबर भेजने में देरी करते थे , तो मैं फोन कर टोकता था - जल्दी करो बहुगुणा जी । ' वैदिक जी की उम्र का लिहाज़ करते हुए मैं उस वक़्त चुप रहा , लेकिन सचाई यह है कि मेरे पिता जब आज से 35 साल पहले तक अखबारों के स्ट्रिंगर रहे , उस वक़्त मोबाइल फोन तो था ही नहीं , लेकिन तब उनके पास कोई लैंड लाइन फोन भी नहीं था , वह प्रायः वनों या सुदूर पहाड़ी गांवों में रहते थे , और पोस्ट कार्ड पर खबर भेजते थे । ऐसे में वैदिक जी उन्हें फोन कहाँ करते होंगे ? लेकिन अब वैदिक जी को क्या कहूँ , जब हाफ़िज़ सईद ही उन्हें कुछ नहीं कह पाया ।

वरिष्ठ और फेंकू पत्रकार वेद प्रताप वैदिक का दावा मित्र सुभाष त्रेहन की पोस्ट पर देख रहा हूँ कि किस तरह उन्होंने 1965 में जे एन यू में हिंदी के समर्थन में क्रान्ति कर दी थी । 1965 में , जब जे एन यू की स्थापना भी नहीं हुयी थी , तब ऐसी क्रान्ति वैदिक ही कर सकते थे । सबको याद होगा , कि किस तरह वैदिक ने कुछ समय पूर्व पाक उग्रवादी हाफ़िज़ सईद के साथ अपना फ़ोटो सोशल मिडिया पर डाल डींग हाँकी थी कि उन्होंने कुख्यात को उग्रवाद छोड़ने की आज्ञा दी । मुझे पूरा विश्वास है कि वैदिक ने उग्रवादी के कान में कहा होगा - दाढ़ी आप पर बहुत फबती है , और इसी बीच सेल्फ़ी ले ली होगी ।
हाल के वर्षों में एक दिन वैदिक मुझे दिल्ली में मिले , और रहस्योद्घाटन किया - तुम्हारे पिता सूंदर लाल बहुगुणा जब नव भारत टाइम्स के संवाददाता थे , और खबर भेजने में देरी करते थे , तो मैं फोन कर टोकता था - जल्दी करो बहुगुणा जी । ' वैदिक जी की उम्र का लिहाज़ करते हुए मैं उस वक़्त चुप रहा , लेकिन सचाई यह है कि मेरे पिता जब आज से 35 साल पहले तक अखबारों के स्ट्रिंगर रहे , उस वक़्त मोबाइल फोन तो था ही नहीं , लेकिन तब उनके पास कोई लैंड लाइन फोन भी नहीं था , वह प्रायः वनों या सुदूर पहाड़ी गांवों में रहते थे , और पोस्ट कार्ड पर खबर भेजते थे । ऐसे में वैदिक जी उन्हें फोन कहाँ करते होंगे ? लेकिन अब वैदिक जी को क्या कहूँ , जब हाफ़िज़ सईद ही उन्हें कुछ नहीं कह पाया ।
Comments
Pravesh Kumari Aisaaa???
Nitish Sharma tongue emoticon smile emoticon
Harish Rawat Surya Prakash Semwal दद्दा देख लो आप ने ऐसे फेंकू से प्रोग्राम की शुरुवात करवाई
Anita Misra इन लोगों को सिर्फ फेकना आता है
Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna फेकना भी आता है और सेंकना भी
Palash Biswas
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Avinash Pawar last sentence is climax.
Banshidhar Tiwari हा हा हा हा।
Bhupendra Pundir वरिष्ट भी और फेकूं भी यानि वरिष्ट फेंकू
Bhupendra Pundir वरिष्ट भी और फेकूं भी यानि वरिष्ट फेंकू
Bhupendra Pundir वरिष्ट भी और फेकूं भी यानि वरिष्ट फेंकू
Ravi Bagoti फेंकू के मित्र है
Ram Mohan Rai कुछ कम कहा
Sudhir Bisht फर्जीयोँ की कमी नही जी
Bhaskar Anand Pagal Kavi Fenku Bole TO .... Varisht....
Abrar Khan masood azhar nahi hafij saeed
Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna शुक्रिया। दुरुस्त करता हूँ
Subhash Belwal Ha ha, sahi kaha aapne Bahuguna ji...
Palash Biswas
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रविन्द्र देवतला ये वैदिक मूलतः अवैदिक हैं दादा।।बोले तो फ़ालतू टीवी चैनल वाला पत्रकार।।हां अब देश का प्रधान सेवक इतना फैक रहा हैं तो इसको क्षमा किया जा सकता हैं।।त्राहिमांम
S.n. Sharma Wah! Phone par farmaan, jaldi karo ha ha ......bahoot khhob.
Sudarshan Juyal संघी हमेशा पकड़े जाते हैं
Amit Chauhan वैदिक झूट झूट न भवति
Satish Saklani चाहे किसी के भी मुखारबिन्दू से निकले झूट हमेशा झूट ही रहेगा , झूट के बलपर सम्मान की अपेक्षा रखना सिर्फ मुँगेरी लाल का सपना साबित होता है यह बात हर किसी को याद रखनी चाहियेँ ।
Asif Khan Hahahahahhaha
Shishram Kanswal कल रात सपने में फेंकू वैदिक से भेंट हुई वैदिक बोले वो नास्त्रेदम ने मोदी जी के बारे घोषणा मेरे सामने लिखी थी
Vijaypal Rawat चलो अब दो फेंकू हो गये।
Harish Chandra Lakhera हाहाहाहाह.रहम करो इस संघी भाई पर-
Hem Pant पीसी तिवारी जी की पिटाई वाले मामले पर हम सबको आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार है... Rajiv Nayan Bahuguna जी
Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna भाई मैं उस सन्दर्भ में यहां कार्यरत हूँ
Palash Biswas
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Sadhvi Meenu Jain फेंकू की लंका में सारे बावन गज की फेंकते हैं
Raman Dhyani He is a student of Feku school of thought. School principal is our P. M.
Kailash Sharma वेदप्रकाश वैदिक आलोचना नहीं बल्कि दया के पात्र हैं.. क्यूंकि वह खुद भी ये नहीं जानते की वह क्या लिख रहे हैं... बस उन्हें लिखना हैं.. इस लिए लिख रहे हैं.. और मुझे तो उन अखबारों पे भी तरस आ रहा है.. जो उन्हें छाप रहे हैं.. और अपनी कीमती जगह को अनुपयोगी बना रहे हैं..और रही बात पाठक की तो जरुरी नहीं की उन का लिखा पढ़े ही...
नूतन यादव वो सरकारी पत्रकार है...बस सरकारी भाषा बोलना जानते है
Trehan Subhash सरकारी भाषा में क्या मात्र झूठ बोला जाता है ?
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Palash Biswas
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Lalit Mohan Lakhera वेदप्रकाश वैदिक ही क्या कई और फैंकू है इस देश में जिन्हें पत्रकारिता से कुछ लेना देना नहीं बस माल कमाना ही धन्धा है उन्हें इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता।
Anusooya Prasad Ghayal दादा नमन ।फेंकू युग मे फेंकू प्रसादों की बयार है कुछ भी फेंक सकते है ।
Jagmohan Rautela एक तो अमर उजाला में हर सोमवार को लिख रही हैं. उन्हें हर बात में अच्छे दिन दिखाई देते हैं . कहीं आज पद्मश्री की लिस्ट में न हों !
Shishram Kanswal मै सकलानी जी की बात से सहमत हूं
Abhay Kulshrestha किसी को पद्मविभूषण मिल जाए तो बुराई क्या है?
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Uvesh Malik Sab juttho ki Jamat he aur unme sabse Juttha unka Leader. Feku
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Sayeed Ayub संघी इतने नंगे हो चुके हैं कि नंगेपन को ही उन्होंने "कपड़ा पहना हुआ" समझ लिया है।
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