Very Very Welcome!Writing book for nothing would not change this scenario.Do something different and I endorse your resolution and I would not write to publish book either.You got a supporter right in kolakata.Dearest Abhishek!
Abhishek Srivastava

कलकत्ता में मेरे एक चाहने वाले सज्जन हैं। रिटायर हो चुके हैं। खोज कर मेरा लिखा पढ़ते रहते हैं। आज सवेरे महीनों बाद उनका फोन आया। पूछने लगे कि पुस्तक मेले में मेरी किताब इस बार आ रही है या नहीं। मैंने इनकार किया। साधिकार बोले- ''तीन साल से मैं आपसे किताब लिखने को कहे जा रहा हूं। कैसे लेखक हो आप? कुछ तो मेरी उम्र का खयाल करो, बड़े-बूढ़ों की सलाह मानने में नुकसान नहीं होता।''
मैंने जब बताया कि मैं कभी कोई किताब नहीं लिखूंगा, तो बिगड गए। लगे डांटने। बोले कि जो आदमी जो काम कर सकता है, उसी से कहा जाता है। आप अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। उसके बाद दुखी होकर फोन रख दिए।
अजीब लोग हैं। समझ में नहीं आता दुनिया में कैसे जिया जाए। कोई भी डांट देता है। बेमतलब। मैंने दोबारा तय कर लिया है कि कभी कोई किताब नहीं लिखूंगा। हां, पुस्तक मेले में रोज जाऊंगा। सबकी किताब पढूंगा। खबरदार जो किसी ने दोबारा पूछा कि आपकी किताब नहीं आ रही है क्या? कस के गरिया दूंगा।
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