अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'जनकृति' का नया अंक (वर्ष 1, अंक 11, जनवरी 2016) आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है..नया अंक पढ़ने हेतू (http://www.jankritipatrika.com/) पर विजिट करें..
(पत्रिका में उपयोग किए गए सभी चित्र व् आवरण पृष्ठ डॉ. लाल रत्नाकर जी द्वारा निर्मित हैं)
नए अंक में प्रकाशित रचनाएं, लेख एवं शोध आलेख- ...
जनकृति (विमर्श केंद्रित अंतरराष्ट्रीय मासिक ई पत्रिका) ISSN 2454-2725
Vol.1, issue.11, January 2016 वर्ष: 1, अंक 11, जनवरी 2016
(पत्रिका में उपयोग किए गए सभी चित्र व् आवरण पृष्ठ डॉ. लाल रत्नाकर जी द्वारा निर्मित हैं)
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जनकृति (विमर्श केंद्रित अंतरराष्ट्रीय मासिक ई पत्रिका) ISSN 2454-2725
Vol.1, issue.11, January 2016 वर्ष: 1, अंक 11, जनवरी 2016
साहित्यिक विमर्श (कविता, नवगीत, कहानी, लघु-कथा, व्यंग्य, ग़ज़ल, संस्मरण, आत्मकथा, पुस्तक समीक्षा)
कविता
पंखुरी सिन्हा, अमन चांदपुरी, आरिफा एविस, डॉ. मधु त्रिवेदी, डॉ. प्रमोद पाण्डेय, हर्षिल पटीदार नव, किशन कारीगर, मंजु महिमा, नीरज कुमार नीर, राम निवास बांयला, सोनिया माला, सुशांत सुप्रिय, स्वपनिल शर्मा, वैष्णवी पी वी, विनोद कुमार जैन
कविता
पंखुरी सिन्हा, अमन चांदपुरी, आरिफा एविस, डॉ. मधु त्रिवेदी, डॉ. प्रमोद पाण्डेय, हर्षिल पटीदार नव, किशन कारीगर, मंजु महिमा, नीरज कुमार नीर, राम निवास बांयला, सोनिया माला, सुशांत सुप्रिय, स्वपनिल शर्मा, वैष्णवी पी वी, विनोद कुमार जैन
नवगीत
जगदीश पंकज
नवीन मणि त्रिपाठी
जगदीश पंकज
नवीन मणि त्रिपाठी
कहानी
बैटन: अमिता नीरव
सुधाकरजी: अंजलि कुमारी
पांचू: दिलीप कुमार पाठक
जनम: विजय कुमार
बैटन: अमिता नीरव
सुधाकरजी: अंजलि कुमारी
पांचू: दिलीप कुमार पाठक
जनम: विजय कुमार
लघुकथा
ग़रीबों का हक़: अजय कुमार चौधरी
पुत्र का पत्र पिता के नाम: सुभाष चंद्र लखेड़ा
ग़रीबों का हक़: अजय कुमार चौधरी
पुत्र का पत्र पिता के नाम: सुभाष चंद्र लखेड़ा
पुस्तक समीक्षा
A History of The Jan Natya Manch: Plays for The People (Book by Arjun Ghosh): Book Review by Mohammad Aamir Pasha
मालगुडी का मिठाई वाला उपन्यास (आर.के.नारायण): समीक्षक- नवीन कुमार
दलदल (कहानी संग्रह: सुशांत सुप्रिय): समीक्षक- सुषमा मुनीन्द्र
काले अध्याय (उपन्यास: मनोज रूपड़ा): समीक्षक- विनोद विश्वकर्मा
A History of The Jan Natya Manch: Plays for The People (Book by Arjun Ghosh): Book Review by Mohammad Aamir Pasha
मालगुडी का मिठाई वाला उपन्यास (आर.के.नारायण): समीक्षक- नवीन कुमार
दलदल (कहानी संग्रह: सुशांत सुप्रिय): समीक्षक- सुषमा मुनीन्द्र
काले अध्याय (उपन्यास: मनोज रूपड़ा): समीक्षक- विनोद विश्वकर्मा
व्यंग्य
पेट और तोंद: राजेंद्र वर्मा
पेट और तोंद: राजेंद्र वर्मा
ग़ज़ल
ग़ज़ल: राघवेंद्र पांडेय
ग़ज़ल: राघवेंद्र पांडेय
यात्रा-वृतांत
जीवन की संवेदना को खोजती यात्राएं: राहुल देव
जीवन की संवेदना को खोजती यात्राएं: राहुल देव
अनुवाद
कविता का अनुवाद: प्रक्रिया और समस्याएं अभिलषा तिवारी
कविता का अनुवाद: प्रक्रिया और समस्याएं अभिलषा तिवारी
रंग विमर्श
मृच्छकटिकम का सामाजिक चित्रण: डॉ. भरत कुमार
सारा का सारा समाज ही ढह रहा है (‘घासीराम कोतवाल’ नाटक की प्रासंगिककता के संदर्भ में): प्रो. हरदीप सिंह
मृच्छकटिकम का सामाजिक चित्रण: डॉ. भरत कुमार
सारा का सारा समाज ही ढह रहा है (‘घासीराम कोतवाल’ नाटक की प्रासंगिककता के संदर्भ में): प्रो. हरदीप सिंह
मीडिया विमर्श
हिंदी सिनेमा, साहित्य और मीडिया का अंतर्संबंध: डॉ. अशोक कुमार मिश्र
साहित्यिक पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य: सुनील कुमार द्विवेदी
स्वास्थ और न्यू मीडिया यानि इंटरनेट: राकेश कुमार
बाजारवाद के दौर में हिंदी पत्रकारिता: एक मूल्यांकन: शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
हिंदी सिनेमा, साहित्य और मीडिया का अंतर्संबंध: डॉ. अशोक कुमार मिश्र
साहित्यिक पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य: सुनील कुमार द्विवेदी
स्वास्थ और न्यू मीडिया यानि इंटरनेट: राकेश कुमार
बाजारवाद के दौर में हिंदी पत्रकारिता: एक मूल्यांकन: शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
दलित एवं आदिवासी विमर्श
भारतीय समाज में आदिवासी: अजय कुमार चौधरी
ओमप्रकाश वाल्मीकि: सामाजिक परिवर्तन के लेखक: माधनुरे श्यामसुंदर
समकालीन दलित लेखन: संवेदना और सरोकार: डॉ. जुही बेग
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और दलित चिंतन: डॉ. अनिल कुमार
आर्वी तहसील के गौंड आदिवासी महिलाओं का सांस्कृतिक जीवन: किरण नामदेवराव कुंभरे
दलित कहानी की वैचारिकी: ओमप्रकाश मीना
भारतीय समाज में आदिवासी: अजय कुमार चौधरी
ओमप्रकाश वाल्मीकि: सामाजिक परिवर्तन के लेखक: माधनुरे श्यामसुंदर
समकालीन दलित लेखन: संवेदना और सरोकार: डॉ. जुही बेग
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और दलित चिंतन: डॉ. अनिल कुमार
आर्वी तहसील के गौंड आदिवासी महिलाओं का सांस्कृतिक जीवन: किरण नामदेवराव कुंभरे
दलित कहानी की वैचारिकी: ओमप्रकाश मीना
स्त्री विमर्श
Women Empowerment: an Emerging Concept: Dr. Monica Ojha Khatri
कितने कपड़े कूटने है अभी: हिंदी स्त्री कविता में खांटी घरेलू औरत व् कामकाजी स्त्री के बिंब (एक विस्तृत अध्ययन): डॉ. हरप्रीत कौर
वर्तमान परिवेश में स्त्री शिक्षा: डॉ. मीना
महिला कथा साहित्य में हाशिए लांघता स्त्री स्वर: डॉ. संदीप रणभिरकर
‘औरत की बोली’ बनाम औरत की आकांक्षा: गुलनाज़ बेग़म
21वीं सदी की कवियित्रियों के काव्य में स्त्री विमर्श: हरकीरत हीर
Women Empowerment: an Emerging Concept: Dr. Monica Ojha Khatri
कितने कपड़े कूटने है अभी: हिंदी स्त्री कविता में खांटी घरेलू औरत व् कामकाजी स्त्री के बिंब (एक विस्तृत अध्ययन): डॉ. हरप्रीत कौर
वर्तमान परिवेश में स्त्री शिक्षा: डॉ. मीना
महिला कथा साहित्य में हाशिए लांघता स्त्री स्वर: डॉ. संदीप रणभिरकर
‘औरत की बोली’ बनाम औरत की आकांक्षा: गुलनाज़ बेग़म
21वीं सदी की कवियित्रियों के काव्य में स्त्री विमर्श: हरकीरत हीर
शोध विमर्श
उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता: विवेक पाठक
उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता: विवेक पाठक
बाल विमर्श
बचपन: प्रिया वच्छानी
बचपन: प्रिया वच्छानी
भाषिक विमर्श
भूमंडलीकरण के दौर में भाषाओं पर बढ़ता ख़तरा: आकांक्षा यादव
भारत के विकास के लिए भारतीय भाषाएँ जरुरी क्यों?: डॉ. जोगा सिंह
भूमंडलीकरण के दौर में भाषाओं पर बढ़ता ख़तरा: आकांक्षा यादव
भारत के विकास के लिए भारतीय भाषाएँ जरुरी क्यों?: डॉ. जोगा सिंह
हिंदी विश्व
Global Profile of Hindi Language: Ravi Kumar
हिंदी का विकास एवं विदेशी विद्वान: डॉ. मो. मजीद मिया
बाज़ार में हिंदी: कमलेश कौर
Global Profile of Hindi Language: Ravi Kumar
हिंदी का विकास एवं विदेशी विद्वान: डॉ. मो. मजीद मिया
बाज़ार में हिंदी: कमलेश कौर
शोध आलेख
वर्तमान हिंदी सिनेमा में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन: मनोज कुमार (सिने विमर्श)
भारत में नदियों की वर्तमान स्थिति: अभिषेक कुमार राय
मन्नू भंडारी की आत्मकथा में दांपत्य बोध: ऐमरेन्सिया खलखो
आधुनिक संस्कृत काव्यों में राष्ट्रीय चेतना (कवियित्रियों के संदर्भ में): अरुण कुमार निषाद
रवीन्द्रनाथ और निराला: कितने दूर, कितने पास: अरुण प्रसाद रजक
सुब्रह्नण्य भारती की राष्ट्रीय चेतना: अशोक कुमार
विदर्भ के ग्रामीण किसानों की आकांक्षाएं, अपेक्षाएं और चुनौतियाँ: बृजेश यादव, अरुण प्रताप सिंह
भक्तिकालीन साहित्य का सामाजिक सरोकार: दीपक कुमार
समकालीन कविता के मुख्य स्वर: धीरेन्द्र सिंह
कला: चित्रकला: ध्रुव कुमार
हिंदी उपन्यास का सौंदर्य: डॉ. प्रवीण कुमार
ब्रजभाषा व उसकी काव्य यात्रा: डॉ. श्याम गुप्त
अर्थापत्ति की उपादेयता: डॉ. सुमन लता
प्रकृति पुरुष-त्रिलोचन शास्त्री: कु. वर्षा, डॉ. मधुलता बारा
भीष्म साहनी का मतवाला बौद्ध चीनी “वाडचू”: मनसुरी तस्लीम
जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ-वर्तमान परिप्रेक्ष्य: रहीम मियाँ
Globalization, Development and The Adivasi Identity: Rahul Chimurkar
जन-समुद्र के कवि वरवर राव: आनंद एस.
बहुजन हिताय राजा- छत्रपति शिवाजी (‘वीर-शिवाजी’ उपन्यास के संदर्भ में): प्रा सचिन मदन जाधव
समाजद्रोही कवि अज्ञेय का व्यक्तित्व एवं काव्य सौंदर्य: सपना मांगलिक
प्रवासी संसार तथा गिरमिट वैचारिकी: सारिका जगताप
नागार्जुन की लोकधर्मिता: सर्वेश पाण्डेय
शमशेर का काव्य और प्रगतिशीलता: शिप्रा किरण
मौन की साधना- असाध्यवीणा: डॉ. उमेश चंद्र शुक्ल
विकास की अवधारणा: गांधीय दृष्टि : विजय कुमार
वर्तमान हिंदी सिनेमा में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन: मनोज कुमार (सिने विमर्श)
भारत में नदियों की वर्तमान स्थिति: अभिषेक कुमार राय
मन्नू भंडारी की आत्मकथा में दांपत्य बोध: ऐमरेन्सिया खलखो
आधुनिक संस्कृत काव्यों में राष्ट्रीय चेतना (कवियित्रियों के संदर्भ में): अरुण कुमार निषाद
रवीन्द्रनाथ और निराला: कितने दूर, कितने पास: अरुण प्रसाद रजक
सुब्रह्नण्य भारती की राष्ट्रीय चेतना: अशोक कुमार
विदर्भ के ग्रामीण किसानों की आकांक्षाएं, अपेक्षाएं और चुनौतियाँ: बृजेश यादव, अरुण प्रताप सिंह
भक्तिकालीन साहित्य का सामाजिक सरोकार: दीपक कुमार
समकालीन कविता के मुख्य स्वर: धीरेन्द्र सिंह
कला: चित्रकला: ध्रुव कुमार
हिंदी उपन्यास का सौंदर्य: डॉ. प्रवीण कुमार
ब्रजभाषा व उसकी काव्य यात्रा: डॉ. श्याम गुप्त
अर्थापत्ति की उपादेयता: डॉ. सुमन लता
प्रकृति पुरुष-त्रिलोचन शास्त्री: कु. वर्षा, डॉ. मधुलता बारा
भीष्म साहनी का मतवाला बौद्ध चीनी “वाडचू”: मनसुरी तस्लीम
जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ-वर्तमान परिप्रेक्ष्य: रहीम मियाँ
Globalization, Development and The Adivasi Identity: Rahul Chimurkar
जन-समुद्र के कवि वरवर राव: आनंद एस.
बहुजन हिताय राजा- छत्रपति शिवाजी (‘वीर-शिवाजी’ उपन्यास के संदर्भ में): प्रा सचिन मदन जाधव
समाजद्रोही कवि अज्ञेय का व्यक्तित्व एवं काव्य सौंदर्य: सपना मांगलिक
प्रवासी संसार तथा गिरमिट वैचारिकी: सारिका जगताप
नागार्जुन की लोकधर्मिता: सर्वेश पाण्डेय
शमशेर का काव्य और प्रगतिशीलता: शिप्रा किरण
मौन की साधना- असाध्यवीणा: डॉ. उमेश चंद्र शुक्ल
विकास की अवधारणा: गांधीय दृष्टि : विजय कुमार
साक्षात्कार
नुक्कड़ नाटक की अध्येता और आलोचक डॉ. प्रज्ञा से बातचीत: मोनिका नांदल
नुक्कड़ नाटक की अध्येता और आलोचक डॉ. प्रज्ञा से बातचीत: मोनिका नांदल
नव लेखन
आलोचना के कब्रिस्तान से: अरुण महेश्वरी
धर्म और धर्मांधता के बीच: डॉ. गुणशेखर (चीन)
पर्यावरण संरक्षण में संत सीचेवाल का योगदान: डॉ जसबीर सिंह
कला की ओर: डॉ. लाल रत्नाकर
हमारे उत्तरदायित्व नैतिकता के परिप्रेक्ष्य: डॉ. प्रतिभा पाण्डेय
प्रवासी प्राविधि में स्वदेशी चकाचौंध (तेजेंद्र शर्मा की कहानियों के बहाने): डॉ. राजेश श्रीवास्तव
अभी भी जिंदा है कमलेश्वर जी की क्रांतिधर्मी रचनात्मक बेचैनी: कृष्ण कुमार यादव
कला: शैलेन्द्र चौहान
संत साहित्य की आवश्यकता और महत्त्व: श्याम स्नेही
सबसे ज़्यादा बदनाम साहित्यकार: वीणा भाटिया
मिलावट का आतंक: बाल मुकुंद ओझा
आलोचना के कब्रिस्तान से: अरुण महेश्वरी
धर्म और धर्मांधता के बीच: डॉ. गुणशेखर (चीन)
पर्यावरण संरक्षण में संत सीचेवाल का योगदान: डॉ जसबीर सिंह
कला की ओर: डॉ. लाल रत्नाकर
हमारे उत्तरदायित्व नैतिकता के परिप्रेक्ष्य: डॉ. प्रतिभा पाण्डेय
प्रवासी प्राविधि में स्वदेशी चकाचौंध (तेजेंद्र शर्मा की कहानियों के बहाने): डॉ. राजेश श्रीवास्तव
अभी भी जिंदा है कमलेश्वर जी की क्रांतिधर्मी रचनात्मक बेचैनी: कृष्ण कुमार यादव
कला: शैलेन्द्र चौहान
संत साहित्य की आवश्यकता और महत्त्व: श्याम स्नेही
सबसे ज़्यादा बदनाम साहित्यकार: वीणा भाटिया
मिलावट का आतंक: बाल मुकुंद ओझा
(पत्रिका में उपयोग किए गए सभी चित्र व् आवरण पृष्ठ डॉ. लाल रत्नाकर जी द्वारा निर्मित हैं)

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