Tuesday, February 9, 2016

‘समकालीन तीसरी दुनिया’ के फरवरी 2016 अंक

मित्रो,
‘समकालीन तीसरी दुनिया’ के फरवरी 2016 अंक की पीडीएफ फाइल भेज रहा हूँ. प्राप्ति सूचना दे सकें तो अच्छा होगा.
पत्रिका के आर्थिक संकट को देखते हुए इस अंक से हमने मुद्रित प्रतियों की संख्या में काफी कमी की है और तय किया है कि जिनके पास इन्टरनेट की सुविधा है उन्हें मुद्रित प्रति न भेज कर केवल पीडीएफ फाइल ही भेजेंगे. इससे हम कागज़, छपाई और डाक खर्च में बचत कर सकेंगे. यह अस्थाई व्यवस्था है; स्थिति ठीक होते ही हम पुरानी व्यवस्था पर लौट सकते हैं. कृपया आप सहयोग करें.
हमारी वेब साईट है www.teesariduniya.com
आनंद   

नवीनतम अंक

शिंजो आबे, मोदी और एशिया की बदलती राजनीति

शिंजो आबे, मोदी और एशिया की बदलती राजनीति

अंक: जनवरी 2016
इस अंक के प्रमुख आकर्षण:
सियासी धुंध के बीच नए साल में अंधी छलांग
ऑक्यूपाई यूजीसी: छात्रों का असाधारण आंदोलन
ननिसार: कॉर्पोरेट घराने पर हरीश रावत की मेहरबानी
वेनेजुएला के चौंकाने चुनाव
सविता सिंह की कविताएं
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महाद्वीपों से

नरेंद्र मोदी की दिल्ली रेली का सच
Updated: October 02, 2013
29 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित रैली को देखकर लौटने के बाद युवा पत्राकार अभिषेक श्रीवास्तव ने एक रिपोर्ट लिखी जिसमें उन्होंने बताया कि रैली में पांच लाख लोगों के होने का दावा करने वाले लगातार गलत जानकारी दे रहे हैं। अभिषेक के अनुसार इस रैली में 50 हजार से लेकर एक लाख तक लोग थे। उनकी यह रिपोर्ट जैसे ही उनके ब्लॉग ‘जनपथ डॉट कॉम’ तथा अन्य ब्लॉगों और ... read more
Pakistan : Enemy Past the Gate?
Edited by: Amir Zia, The News
All of a sudden some of the high and mighty of this country seem to have woken up to the fact that Taliban insurgents have gained a foothold in Karachi. These religious zealots are resorting to bank robberies, kidnappings and extortion to raise funds for the so-called ... read more
Africa: the next twenty years
Edited by: J. Paul Martin  |  Updated: December 19, 2012
What can Africa anticipate over the next twenty years? More of the same? If it is not to be more of the same, what economic and political processes need to change? J. Paul Martin looks into Africa’s future and addresses these crucial questions... read more

संपादक की पसंद

हाशिमपुरा के पीड़ितों को न्याय नहीं
समकालीन तीसरी दुनिया’ के अप्रैल 2015 अंक से
सुरक्षाकर्मियों की हिरासत में हत्या की सबसे बड़ी घटना के रूप में हाशिमपुरा भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दर्ज हो चुका है। 22 मई 1987 को जब 19 पीएसी (प्राविंसियल आर्म्ड कांसटेबुलरीद्) के जवानों ने मेरठ के हाशिमपुरा मोहल्ले से 42 मुसलमानों को उठाकर गाजियाबाद के...
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अवश्य देखें

India - Nepal Relations
Discussion with Mr. Anand Swaroop Verma on India - Nepal relations

स्तकें

Monarchy vs. Democracy
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Maoist Movement in Nepal
By: Anand Swaroop Verma
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नेपाल से जुड़े कुछ सवाल
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रोल्पा से डोल्पा तक
By: आनंद स्वरूप वर्मा
Price: 150.00
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