फ़िज़िक्स में वह एमएससी करना चाहती थी. एंट्रेंस में उसे फ़ेल कर दिया गया. चैलेंज करने पर पता चला कि रिटेन में 70 में से उसे 64 मार्क्स मिले हैं. उसने टीचर से पूछा, आपने मुझे फ़ेल क्यों कर दिया था. टीचर का जवाब था : तुम नंबर लेकर क्या करोगी ? तुम्हें तो रिज़र्वेशन से जगह मिल जाएगी. जनरल में क्यों आना चाहती हो ?
और भर्ती हो जाने के बाद उसे लगातार प्रयोगशाला में काम करने से रोका जाता रहा. यह उस विश्वविद्यालय की कहानी है, जिसे मैं नज़दीक से जानता हूं. लेकिन हर जगह यह हालत है.
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