Tuesday, February 2, 2016

फ़िज़िक्स में वह एमएससी करना चाहती थी. एंट्रेंस में उसे फ़ेल कर दिया गया. चैलेंज करने पर पता चला कि रिटेन में 70 में से उसे 64 मार्क्स मिले हैं. उसने टीचर से पूछा, आपने मुझे फ़ेल क्यों कर दिया था. टीचर का जवाब था : तुम नंबर लेकर क्या करोगी ? तुम्हें तो रिज़र्वेशन से जगह मिल जाएगी. जनरल में क्यों आना चाहती हो ? और भर्ती हो जाने के बाद उसे लगातार प्रयोगशाला में काम करने से रोका जाता रहा. यह उस विश्वविद्यालय की कहानी है, जिसे मैं नज़दीक से जानता हूं. लेकिन हर जगह यह हालत है.

फ़िज़िक्स में वह एमएससी करना चाहती थी. एंट्रेंस में उसे फ़ेल कर दिया गया. चैलेंज करने पर पता चला कि रिटेन में 70 में से उसे 64 मार्क्स मिले हैं. उसने टीचर से पूछा, आपने मुझे फ़ेल क्यों कर दिया था. टीचर का जवाब था : तुम नंबर लेकर क्या करोगी ? तुम्हें तो रिज़र्वेशन से जगह मिल जाएगी. जनरल में क्यों आना चाहती हो ?
और भर्ती हो जाने के बाद उसे लगातार प्रयोगशाला में काम करने से रोका जाता रहा. यह उस विश्वविद्यालय की कहानी है, जिसे मैं नज़दीक से जानता हूं. लेकिन हर जगह यह हालत है.
Comments
Urmilesh Urmil इसीलिये भारत आजादी के बाद इतना सुखी, समृद्ध, प्रतिभासम्पन्न और ताकतवर समाज बना है! सिफ॓ योग्य और मेरिट वाले ही तो निण॓यकारी स्थानों पर हैं!
Mohd Mustaquim शर्मनाक सच्चाई
Ashok Sachan frown emoticon
LikeReply222 hrs
Vijay Kumar फेल करना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि ये 'साबित किया जाता रहे' की इनके पास दिमाग ही नहीं होता। अब चैलेंज कोई हर बन्दा तो करेगा नहीं। गज़ब..!!

मानव सभ्यता, विकास, जेनेटिक संरचना और मस्तिष्क की संरचना और कार्य करने के अद्यतन जानकारियों के आलोक में ऐसे सभी उपक्रम क्रिमिनल बीहैवियर के रूप में देखे जाने की जरुरत है। यह मानवता के विरुद्ध जानबूझकर किया गया अत्याचार है।
LikeReply616 hrs
Chandravali Patel Us teacher ke khilaff action bhi nhi le sakte..ye hai mera sabhya samaj
LikeReply515 hrs

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