रोहित वेमुला के लिए मार खाते बच्चे और विशाल जुलूस।बंद करो नफरत और ज़ुल्म।यह लोकतंत्र है।जनता खड़ी हो गयी तो दफ़्न कर दिये जाओगे।
किलों पर जितनी चाहे उतनी निजी सेना तैनात कर लें हुक्मरान।
बाजू भी बहुत हैं तो सर भी बहुत हैं!
हिंसा और नरसंहार के खिलाफ जाग रहा है भारत का जनमानस अग्निपाखी!
मुंबई में सिंह गर्जना से जाहिर है कि दिल्ली और नागपुर के लठैतों की चलेगी नहीं।और तो और,संघ के मुख्यालय नागपुर की दीक्षाभूमि से एक बहुत बड़ा मोर्चा संघ मुख्यालय तक गया और वहां ऐसा निरंतर होने वाला है।
बुद्धं शरणमं गच्छामि कोई हिंदुत्व की तरह राजनीतिक धर्म नहीं है।यह भारत के इतिहास की गूंज है।यह गूंज देशभर में तेज होने जा रही हैं ।
हिंसा ,घृणा और नरसंहार उत्सव के खिलाफ नागपुर और कोलकाता में ही नहीं, देशभर में अमन चैन के लिए शांति मार्च निकलने को है।
रोहित वेमला अब कोई चेहरा नहीं है।
रोहित वेमुला अब कोई अस्मिता भी नहीं है।न जात न मजहब।
यह चेहरा फासिज्म के राजकाज के खिलाफ जनता के हक हकूक की लड़ाई का बवंडर है जो सत्तर साल से ठहरा हुआ था,अब शुरु हुआ है।
http://letmespeakhuman.blogspot.in/2016/02/sfi-activists-raise-slogans-at-rohith.html

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