Tuesday, February 9, 2016

Rajiv Lochan Sah नैनिसार प्रकरण पर कल 8 फरवरी को अल्मोड़ा में हुई रैली अदभुत थी. 1994 के राज्य आन्दोलन के बाद अल्मोड़ा में ऐसा जन सैलाब कभी नहीं उमड़ा. राज्य आन्दोलन के बाद हताश होकर घर बैठ गए अनेक पुराने दिग्गज इस रैली में थे तो उस युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि भी, जिसे हम अराजनैतिक मानते आये हैं. इस परिघटना में राज्य बनने के बाद पहली बार एक नए आन्दोलन की आहट सुनाई दे रही है. अब यह नेतृत्व के हाथ में है कि वह धैर्य, विवेक और समझदारी दिखा कर इस ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करे, इसे स्खलित न होने दे. दिक्कत अख़बारों की है. हिंदुस्तान और जागरण के हल्द्वानी संस्करणों ने इस खबर को पहले पेज पर छपा है तो अमर उजाला ने जनांदोलनों के प्रति अपनी वितृष्णा की परंपरा को बनाये हुए रख बिलकुल ही लापता कर दिया है. यानी उत्तराखंड के सबसे अधिक प्रसार वाले अखबार के सिर्फ अल्मोड़ा के पाठक, जो शायद वैसे ही इस रैली की गूँज सुन चुके होंगे, इस खबर को पढ़ेंगे. यानी इन तीन अख़बारों के पाठकों के सिर्फ 25 प्रतिशत को ही नैनिसार प्रकरण की जानकारी होगी. इस तथ्य को फिलवक्त देहरादून में रह रहे मेरे भतीजे के फोन सही साबित किया, जब हिन्दुस्तान में कल की रैली की खबर पढ़ कर उसने पूछा कि यह नैनिसार मामला है क्या ? तब इस आन्दोलन का विस्तार कैसे होगा ? राज्य आन्दोलन में इसका बिलकुल उल्टा था. मीडिया आज का एक बटे दस था, मगर पूरी तरह आन्दोलन के साथ था. इस राज्य को बर्बाद करने में जितनी बड़ी भूमिका बेईमान राजनेताओं की है, उससे कम लालची मीडिया के नहीं. नैनिसार आन्दोलन को इन्हीं सीमाओं के साथ आगे बढ़ाना होगा.

नैनीसार हमारा है!The mothers and sisters lead the resistance in the Himalayas yet again!


https://www.youtube.com/watch?v=XkZVvNzmXxk&feature=youtu.be

Rajiv Lochan Sah
नैनिसार प्रकरण पर कल 8 फरवरी को अल्मोड़ा में हुई रैली अदभुत थी. 1994 के राज्य आन्दोलन के बाद अल्मोड़ा में ऐसा जन सैलाब कभी नहीं उमड़ा. राज्य आन्दोलन के बाद हताश होकर घर बैठ गए अनेक पुराने दिग्गज इस रैली में थे तो उस युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि भी, जिसे हम अराजनैतिक मानते आये हैं. इस परिघटना में राज्य बनने के बाद पहली बार एक नए आन्दोलन की आहट सुनाई दे रही है. अब यह नेतृत्व के हाथ में है कि वह धैर्य, विवेक और समझदारी दिखा कर इस ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करे, इसे स्खलित न होने दे.
दिक्कत अख़बारों की है. हिंदुस्तान और जागरण के हल्द्वानी संस्करणों ने इस खबर को पहले पेज पर छपा है तो अमर उजाला ने जनांदोलनों के प्रति अपनी वितृष्णा की परंपरा को बनाये हुए रख बिलकुल ही लापता कर दिया है. यानी उत्तराखंड के सबसे अधिक प्रसार वाले अखबार के सिर्फ अल्मोड़ा के पाठक, जो शायद वैसे ही इस रैली की गूँज सुन चुके होंगे, इस खबर को पढ़ेंगे. यानी इन तीन अख़बारों के पाठकों के सिर्फ 25 प्रतिशत को ही नैनिसार प्रकरण की जानकारी होगी. इस तथ्य को फिलवक्त देहरादून में रह रहे मेरे भतीजे के फोन सही साबित किया, जब हिन्दुस्तान में कल की रैली की खबर पढ़ कर उसने पूछा कि यह नैनिसार मामला है क्या ?
तब इस आन्दोलन का विस्तार कैसे होगा ? राज्य आन्दोलन में इसका बिलकुल उल्टा था. मीडिया आज का एक बटे दस था, मगर पूरी तरह आन्दोलन के साथ था. इस राज्य को बर्बाद करने में जितनी बड़ी भूमिका बेईमान राजनेताओं की है, उससे कम लालची मीडिया के नहीं.
नैनिसार आन्दोलन को इन्हीं सीमाओं के साथ आगे बढ़ाना होगा.
Comments
Harish Rawat सभी प्रमुख आंदोलनकारियों का एक मंच पे आना आने वाले उत्तराखंड के लिए शुभ संकेत हैं
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Anil Mahara Chutiyo ka jamghat....
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Arun Pant Is that what you have been taught and will pass on Mr Mehra ?
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Gopu Bisht Mr. अनिल ....कौन है, ये तो आपके घर के संस्कारों से पता चल रहा है।
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Palash Biswas
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Vineet Fulara रैली वाकई में बहुत अद्भुत थी, दूर दूर से पहुंचे हुवे आंदोलनकारियो का जोश और गुस्सा देखने लायक था..खुद अल्मोड़ा के लिए भी ऐतिहासिक दिन रहा...गूँज दूर तक गई है
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Dataram Chamoli जय हो
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Prithavi Laxmi Raj Singh मुखपत्र और समाचार पत्र दो अलग अलग चीजें हैं। संवैधानिक स्तम्भों का एक रुप यह कम खतरनाक नहीं है । अमर उजाला में न्यूज न बन पाना वाकई अजीब बात है हालांकि भैंसे को करन्ट जैसी खबरें यथावत बनी हुई थी
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Vineet Fulara पृथ्वी जी, गूँज दूर तक गई है, मेरे एक मित्र dewakar joshi जी का इंग्लैंड से मेसेज आया था कि "बात क्या है आखिर, क्या हो रहा है नैनिसार में?" सोशियल मीडिया अपनी पूरी भूमिका निभा रहा है आन्दोलन में.....बिकाऊ मीडिया से उम्मीद बेईमानी है.
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Palash Biswas
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Nandaballabh Bhatt Mr. Mahara apni bhasha me sayam barte, es jamghat ka netritwa 93 saal ke swatantrata senani ne kiya, aap apne se bdu ke liye aisi apatti janak bhasha ka prayog krte hai mujhe aap jaise logu pr sharm aati hai
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O.p. Pandey कौन है ये मेहरा ? अपने शब्द वापस लो तुरंत mr मेहरा
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Jagdamba Prasad Maithani ये मेहरा जी नैनीताल के ही हैं- इनके प्रोफाइल में जानकारी है.
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Rajiv Lochan Sah जाने दो ओपी, जगदम्बा. घर से यही संस्कार मिले होंगे. बाकी आज का मीडिया और राजनीति सिखा रहे हैं.
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Palash Biswas
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Bhuvnesh Joshi Chalo is bahane he uttrakgandi takete ak manch pe aaye 22 barash bad subh sanket he ye.....ye mahra koi Rawat ke tukdo me palne wala lagta he ignore him and block him
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Gopu Bisht इन काले अंग्रेजों का वक़्त बुरा आने वाला है, जल्द ही सबको पता चल जाएगा... ! ये इस अनिल माहरा के संस्कारों ने बता दिया।
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Palash Biswas
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Mahesh Pande यह जज्बा बना रहे
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Nandaballabh Bhatt Jajba bna rhega ya nhi pta nhi kyu chinta bni hue hai
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Surinder Singh Bhandari हकों की लड़ाई
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Jagdamba Prasad Maithani समाचार जरूरीहैं--प्रचार के लिए !
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Mukesh Prasad Bahuguna एक लम्बे समय के बाद आप सब लोगों को एक साथ देखना न सिर्फ सुखद है अपितु राज्य के जन सरोकारों के लिए शुभसंकेत भी है ,,,, विश्वास है कि ऐसा कारवां बना रहेगा मजबूती के साथ I
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Salim Ukd Jai ho
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Bharat Rawat संघर्ष को सलाम
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Gyan Pant यह शुभ संकेत है .... नेता तो खैर क्या करेंगे , बुद्धिजीवी वर्ग जो राजनीति में दखल रखता है और युवा जो राजनीति में आये हैं या आ रहे हैं .... इसे वोट में बदलने की जिम्मेदारी लें । बीजेपी , कांग्रेस से अलग सोच वाले सब साथ आ जायें तो सही मायने में पहाड़ सरका...See More
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