Wednesday, August 17, 2016

आज 13 लोग मरे नहीं मारे गये हैं - एक तानाशाह निर्णय के कारण ! आप समझिये , समझ सकते तो अपने साथी लालू जी से समझिये- वे गरीब का दर्द समझते हैं!

आज 13 लोग मरे नहीं मारे गये हैं - एक तानाशाह निर्णय के कारण ! आप समझिये , समझ सकते तो अपने साथी लालू जी से समझिये- वे गरीब का दर्द समझते हैं!
Sanjeev Chandan

एक क्वार्टर की कीमत तुम क्या जानो नीतीश बाबू ( गोपालगंज में 13 मौत के बीच नीतीश कुमार के नाम छोटी चिट्ठी)
नीतीश बाबू, कभी समय मिले तो अपनी राजनीतिक यात्रा और अपने राजनीतिक स्टैंड पर विचार करियेगा. एक तथ्य की ओर ध्यान दिलाता हूँ आपका. याद है न संजय गांधी ने नसबंदी का जो प्रोग्राम लाया था. क्या कमी थी उस प्रोग्राम में? कितना बढ़िया था कि पहली बार महिलाओं की नहीं पुरुषों की नसबंदी का आदेश दिया उन्होंने. यह एक जनपक्षधर निर्णय था. लेकिन दिक्कत थी उनकी जोर-जबरदस्ती में- वह जनपक्षधर निर्णय एक तानाशाह का निर्णय बन गया- देश ने उसका विरोध किया-आपने भी किया था. संजय गांधी को सनक थी देश सुधारने की, आपको सनक है बिहार सुधारने की. शराबबंदी तक तो ठीक है, लेकिन जोर-जबरदस्ती ! समाज सुधार का काम स्टेट करे तो ठीक है, लेकिन ऐसे नीतीश बाबू, डंडे के बल पर ! और क़ानून यह कि 'करे मंगरा भरे टेंगरा'. कल्पना करिए की ऐसा होता कि परिवार नियोजन का उल्लंघन करते बुद्धन बाबू- बच्चा होता उनका तीसरा और गिरफ्तार होते सुक्खन ठाकुर - कुछ ऐसा ही कानून लेकर आये हैं न आप !
जबरदस्ती की शराबबंदी का कमाल है कि आज गोपालगंज में 13 मरे- संदेहास्पद मौत बता रहा है आपका तंत्र और मृतकों के रिश्तेदार बता रहे हैं कि मरे हैं वे शराब पीने से. ऐसा ही होता है, शराबबंदी जिले में 10 साल तक रहे हैं हम, अब भी वह हमारा दूसरा घर है- वहाँ कभी शराब की दिक्कत नहीं महसूस हुई पीने वालों को, शराब सप्लाई हो जाता था, पुलिस वालों या एन सी सी कैम्प से. इसके अलावा शराब का अवैध व्यापार खूब था वहाँ- हम तीन साल सक्रिय पत्रकार थे वहाँ- जगह-जगह ठिकाना जानते थे और पुलिस की मिलीभगत भी.
जनाब हाड़तोड़ मेहनत करके घर आने पर एक क्वार्टर शराब का सुख आप क्या जानोगे नीतीश बाबू ! आपके राज्य में ही कभी खालिस मजदूरों के इलाके में जाइए. मैं गया हूँ आपके बाराचट्टी के इलाके में नीम दुपहरिया में- स्त्री-पुरुष दोनो पीकर मस्त !
आज 13 लोग मरे नहीं मारे गये हैं - एक तानाशाह निर्णय के कारण ! आप समझिये , समझ सकते तो अपने साथी लालू जी से समझिये- वे गरीब का दर्द समझते हैं!
पुनश्च
एनसीपी के एक राज्यसभा मेंबर से मिला था- उन्होंने हंसते हुए कहा था कि ' नीतीश बाबू के वे राज्यसभा सदस्य सबसे ज्यादा मुखर हैं शराबबंदी के पक्ष में, जिनकी शाम शराब के बिना संभव ही नहीं.' सुना है कि आप रसरंजन वाले साहित्यकारों से असहिष्णुता को समझने का क्लास भी ले रहे हैं!!

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