उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षक बतौर, हरीश रावत का गुणगान करने वाले संस्कृति के प्रबुद्ध जानकारों का -संस्थावद्ध हो गए माफियाराज पर ढोल,मेलों को वरीयता देना दरबारी संस्कृति की उत्तराखंड में एक नई मिसाल है।प्राकृतिक संसाधनों की चौतरफा लूट,राजनीति के अपराधीकरण और कानून की धज्जीयां उडाने वाली सरकार उत्तराखंड की संस्कृति की नहीं माफिया संस्कृति की ध्वजा वाहक है।उत्तराखंड आंदोलन के गीतों में राज्य की संस्कृति प्रतिध्वनित होती है और माफिया संस्कृति के खिलाफ लडकर ही नई संस्कृति का सृजन होगा ।हमारी धरोहर भी तभी सुरक्षित रहेगी।राज्य गठन के पश्चात कांग्रेस-भाजपा द्वारा जारी लूट खसौट के साथ जिस पतित संस्कृति ने उत्तराखंड को दबोच लिया है-उससे मुक्त होना एक रेडिकल वैचारिक राजनीतिक सोच में नीहित है।
Let me speak human!All about humanity,Green and rights to sustain the Nature.It is live.
Tuesday, February 9, 2016
उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षक बतौर, हरीश रावत का गुणगान करने वाले संस्कृति के प्रबुद्ध जानकारों का -संस्थावद्ध हो गए माफियाराज पर ढोल,मेलों को वरीयता देना दरबारी संस्कृति की उत्तराखंड में एक नई मिसाल है।प्राकृतिक संसाधनों की चौतरफा लूट,राजनीति के अपराधीकरण और कानून की धज्जीयां उडाने वाली सरकार उत्तराखंड की संस्कृति की नहीं माफिया संस्कृति की ध्वजा वाहक है।उत्तराखंड आंदोलन के गीतों में राज्य की संस्कृति प्रतिध्वनित होती है और माफिया संस्कृति के खिलाफ लडकर ही नई संस्कृति का सृजन होगा ।हमारी धरोहर भी तभी सुरक्षित रहेगी।राज्य गठन के पश्चात कांग्रेस-भाजपा द्वारा जारी लूट खसौट के साथ जिस पतित संस्कृति ने उत्तराखंड को दबोच लिया है-उससे मुक्त होना एक रेडिकल वैचारिक राजनीतिक सोच में नीहित है।
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