आईआईएमसी में दलित और गैर दलित के बीच बंटे छात्र via @CatchHindi
Abhishek Srivastava with Sanjeev Chandan and 16 others.
IIMC में कुछ गड़बड़ हो रहा है, इसकी मुझे आज सुबह से बू आ रही है। जिन लोगों ने भी मामले को प्रेस में सरकाया है, उन्होंने जानबूझ कर बड़ी गलती की है। अब छूटा हुआ तीर वापस नहीं आने वाला। इस मामले का राजनीतिकरण किया जा चुका है जबकि इसे संस्थान के भीतर आरोपी छात्र के माफ़ीनामे के बाद ही खत्म कर दिया जाना चाहिए था। अगर इस छात्र का निष्कासन किया जाता है, तो उसके संभावित परिणाम का जवाबदेह कौन होगा?
इतनी राजनीति तो हम सब समझते हैं कि रोहित वेमुला कांड के बाद सरकार व संस्थानों के भीतर बैठे पंडों की नींद हराम है। ब्राह्मणवाद को हमेशा ऐसे हालात से निपटने के लिए अपनों के बीच से ही एक बलि की ज़रूरत होती है। मुझे शक़ है कि आइआइएमसी के मामले के बहाने कुछ दक्षिणपंथी तत्व आरोपी छात्र को घेरघार कर अलगाव में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
हम नहीं चाहते कि किसी भी युवा के साथ ज्यादती हो, ब्राह्मणवाद के नाम पर या आंबेडकरवाद के नाम पर। मुझे शक़ है कि रोहित वेमुला की एंटी-थीसिस दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान में लिखी जा रही है। हो सकता है मेरा आकलन ग़लत भी हो, लेकिन सब मिलकर कम से कम वहां हालात को बिगड़ने से ज़रूर रोकें।

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