Thursday, April 21, 2016

मोदी ने कर दिया ऐलान कि दीदी हार रही हैं ,इसीलिए हिंसा दीदी और चुनाव आयोग के मुताबिक शांतिपूर्ण मतदान प्रधानमंत्री ने खुल्ला ऐलान कर दिया है कि बंगाल में वोट का लूट हुआ है। अब यक्ष प्रश्न यह है कि चुनाव आयोग की भूमिका आखिर क्या है। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप

मोदी ने कर दिया ऐलान कि दीदी हार रही हैं ,इसीलिए हिंसा
दीदी और चुनाव आयोग के मुताबिक शांतिपूर्ण मतदान
प्रधानमंत्री ने खुल्ला ऐलान कर दिया है कि  बंगाल में वोट का लूट हुआ है।
अब यक्ष प्रश्न यह है कि चुनाव आयोग की भूमिका आखिर क्या है।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
हस्तक्षेप

बंगाल में तीसरे चरण में भी भूतों का नाच जमकर हुआ और लू के बीच ,भारी और व्यापक हिंसा के बीच फर्जी मतादान,बूथों पर कब्जा,वोटरों से मारपीट,प्रत्याशियों पर हमला,मीडिया पर हमला वगैरह वगैरह बेरोकटोक एक लाख सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में होता रहा।दीदी के गढ़ कोलकाता  के जोड़ासांको में केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो के साथ गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने धक्कामुक्की की।

इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रथम दष्टया आचार संहिता उल्लंघन के मामले में भेजे गए चुनाव आयोग के कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री की ओर से राज्य के मुख्य सचिव ने जवाब भेजा था, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया था। इस संबंध विस्तृत जानकारी देने से इनकार करते हुए चुनाव आयोग (ईसी) के एक अधिकारी ने बताया, चुनाव आयोग के नोटिस पर ममता बनर्जी का जवाब आ गया है और जांच जारी है। बहरहाल, मुख्य सचिव बासुदेब बनर्जी की ओर से मिले जवाब को खारिज करने के बाद ईसी ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष को कल सुबह तक उत्तर देने का समय दिया था।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के शोकॉज का जवाब मुख्य सचिव के देने पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाया। चुनाव आयोग हरकत में आया और कहा कि मुख्यमंत्री को खुद जवाब देना पड़ेगा। ममता ने भी तर्क दिया कि मुख्यमंत्री से सवाल करने पर उसका जवाब सरकारी स्तर पर ही दिया जाएगा। पार्टी नेता से जवाब तलब करने पर वह स्वयं जवाब देने के लिए बाध्य होंगी।

चुनाव आयोग को अब तक हिंसा और गड़बड़ियों की 1,500 शिकायतें मिली हैं। महानगर क्षेत्र में अभी तक 47 लोगों को गड़बड़ी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन तमाम शिकायतों को जाहिर है चुनाव आयोग ने कचरापेटी में डाल दिया।

जिलों से लगातार नये नये इलाके से हिंसा और बमबाजी,गोलीबारी की खबरें आ रही हैं जो टीवी के परदे पर खून की गंगा बह रही है।जबकि पिछले दो चरणों के मुकाबले मतदान अबकी दफा उतनी भारी नहीं है।फिलहाल अधिकारियों ने 67 फीसदी से ज्यादा मतदान होने की जानकारी दी है। हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव में शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के समय के बाद भी कई बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।

पश्चिम बंगाल में आज तीसरे चरण के चुनाव में 4 जिलों की 62 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। यहां कुल एक करोड़ 37 लाख मतदाताओं ने 418 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला किया, जिनमें से 34 महिला उम्मीदवार हैं। शाम पांच बजे तक 79.22 फीसदी वोटिंग हुई। कोलकाता में 57.05, नादिया में 81.62 फीसदी, मुर्शिदाबाद में 79.29 फीसदी, बर्दवान में 78.26 फीसदी वोट पड़े।

चुनाव आयोग के अधिकारी संदीप सक्सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कुछ जगहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं। उन्होंने कहा कुछ जगहों पर देसी बम भी फेंके गए है।

जो हम देख रहे हैं,जो जनता देख रही है,वह सच नहीं है क्योंकि सत्ता के लिए बेलगाम हिंसा का मतलब ही हिंसा है तो यक्ष प्रश्न यह है कि चुनाव आयोग की भूमिका आखिर क्या है।

इसके बावजूद मुख्यमंत्री का दावा है कि सत्तादल के किसी कार्यकर्ता या समर्थकों का हाथ किसी वारदात में नहीं हैं।

बूथों पर हिंसा के बारे में चुनाव आयोग की सफाई है कि इसका मतदान से कोई संबंध नहीं है तो दीदी कह रही हैं कि लोग आपसी झगड़े निबटा रहे थे।

दीदी और चुनाव आयोग,दोनों का कहना है कि तीसरे चरण का मतदान भी शांतिपूर्ण है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर बंगाल फतह करने के लिए हावड़ा और उत्तर 24 परगना की चुनाव सभाओं को संबोधित किया और उनने ऐलान कर दिया कि इतनी हिंसा इसलिए हो रही है कि दीदी ने मान लिया है कि वे चुनाव हार रही हैं।

दीदी की राजनीति की शुरुआत से कोलकाता में उन्हें प्रबल जनसमर्थन मिलता रहा है लेकिन आज कोलकाता के सात विधानसभाी इलाकों में बहिरागत भूतों के सहारे जिस निर्लज्ज तरीके से जनादेश का अपहरण लोकतंत्र की ह्त्या को अंजम देकर किया गया,उससे जाहिर है कि दीदी का हौसला कितना बुलंद है और किस तरह के चुनाव नतीजे की उन्हें उम्मीद है या अंदेशा है।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर केंद्र सरकार दोबारा गौर करें तो बेहतर है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में हुई हिंसा पर मतदान के खत्म होने से पहले जम कर कटाक्ष किया है।

गौरतलब है कि मोदी ने हावड़ा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सभी जगह चुनाव के बाद कहा जाता है कि चुनाव शांतिपूर्ण हुआ है, लेकिन बंगाल में कहा जाता है कि कितनी बूथें लूटी गयीं, कितनों की मौत हुई है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने खुल्ला ऐलान कर दिया है कि  बंगाल में वोट का लूट हुआ है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने कह दिया कि यह हिंसा इस बात का सबूत है कि दीदी ने पराजय स्वीकार कर ली है।

प्रधानमंत्री ने कह दिया कि पराजय दीवार पर लिखा दिखायी देता है। मरता क्या नहीं करता। लेकिन, दीदी, अब बंगाल की जनता आपको भली भांति पहचान गयी है। जिस परिवर्तन के लिए बंगाल की जनता ने यहां परिवर्तन लाया। वह आपमें परिवर्तन देख कर गुस्साई हुई है और उन लोगों को चुन-चुन कर साफ कर देगी, जिन्होंने बंगाल को बर्बाद किया है।

प्रधानमंत्री ने कह दिया कि  लोगों ने इस तरह के बंगाल की कल्पना नहीं की थी।

चुनाव में चार राजनीतिक दल हैं। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक विश्वलेषकों से अपील की है  कि वह इन चारों दलों को तराजू पर तौले और देखें कि किस दल ने किया क्या है ?

कोलकाता के अलावा मुर्शिदाबाद, नादिया और बर्दवान में सर्वत्र कमोबेश  हिंसा की घटनाएं देखी गई।

मुर्शिदाबाद के डोमकल में माकपा कर्यकर्ता ताहिदुल इस्लाम (30) की देसी बम हमले में मौत हो गई।
हालांकि  चुनाव आयोग ने इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है।
डोमकल से चुनाव लड़ रहे माकपा के अनीसुर रहमान ने आरोप लगाते हुए कहा, “तृणमूल हार के डर से हिंसक गतिविधियों में संलिप्त हो रही है और इस्लाम की मौत इसी का नतीजा है। वह तृणमूल के गुंडों को मतदान केंद्र के अंदर जाने से रोक रहे थे, इसलिए उन्होंने उन्हें मार दिया।”
इसके विपरीत डोमकल से तृणमूल प्रत्याशी सौमिक हुसैन ने कहा कि इस्लाम की मौत माकपा और कांग्रेस के बीच के संघर्ष का नतीजा है।
डोमकल में मतदान के दौरान हुई हिंसा में कम से कम चार अन्य लोग घायल हुए हैं।
एक घायल ने दावा किया, “पिछली रात को कुछ लोगों ने मुझे वोट नहीं डालने की धमकी दी थी, लेकिन मैंने उनकी नहीं सुनी। जब मैं अपना वोट देकर वापस आ रहा था तभी मुझ पर हमला हुआ।”
डोमकल से चुनाव लड़ रहे पूर्व पुलिस अधिकारी नजरुल इस्लाम ने चुनाव आयोग पर जानबूझकर अक्षम रहने का आरोप लगाया है।
नजरुल इस्लाम ने अपनी खुद की मूलनिवासी पार्टी बनाई है। उन्होंने बताया, “चुनाव आयोग जानबूझकर अक्षम बना हुआ है। यह तृणमूल और भाजपा के गठजोड़ का नतीजा है।”
बर्दवान जिले के केतुग्राम से भी हिंसा की सूचना है जहां एक मतदान केंद्र के पास फेंके गए देसी बम से तीन घायल हो गए। वहीं, नादिया जिले के सगुना मतदान केंद्र से भी कई देसी बम बरामद किए गए।

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