Saturday, March 19, 2016

ऐसी ही फिल्मों को बनाने और आदिवासियों के लिए सक्रिय देब रंजन को फिर से ओडिशा पुलिस ने गिरफ़्तार किया ! " हमारा गाँव तो नक्सलाइटों का है न ? फिर नक्सलाइटों को राशन-पानी देने क्यों आये हो ? नक्सली को कोई राशन-पानी और मदद देता है ? हमको हमारे सत्रह लोग लौटा दो। क्या हमलोग अपनों की जान बेच कर खाते हैं ? क्या हमारे पास खाने-पहनने के लिए कुछ नहीं है ? हमको नहीं चाहिए यह सब। ले जाओ सब वापस ! जिस छोटी बच्ची को आपने पेड़ पर मारा क्या वह नक्सलाइट थी ? क्या वह पेड़ पर चढ़ कर भाषण दे रही थी ? " (16:09) देब रंजन की फिल्म वासुगौडा एनकाउंटर (2012) से, जिनके पीछे ओडिशा पुलिस पड़ी है !

ऐसी ही फिल्मों को बनाने और आदिवासियों के लिए सक्रिय देब रंजन को फिर से ओडिशा पुलिस ने गिरफ़्तार किया !
" हमारा गाँव तो नक्सलाइटों का है न ? फिर नक्सलाइटों को राशन-पानी देने क्यों आये हो ?
नक्सली को कोई राशन-पानी और मदद देता है ? हमको हमारे सत्रह लोग लौटा दो। क्या हमलोग अपनों की जान बेच कर खाते हैं ? क्या हमारे पास खाने-पहनने के लिए कुछ नहीं है ? हमको नहीं चाहिए यह सब। ले जाओ सब वापस ! जिस छोटी बच्ची को आपने पेड़ पर मारा क्या वह नक्सलाइट थी ? क्या वह पेड़ पर चढ़ कर भाषण दे रही थी ? " (16:09) देब रंजन की फिल्म वासुगौडा एनकाउंटर (2012) से, जिनके पीछे ओडिशा पुलिस पड़ी है ! 
An all-India fact-finding team of rights activists belonging to the Coordination of Democratic…
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