तथागत बुद्ध, संत कबीर और राष्ट्रपिता ज्योतिबा के पास सामाजिक शिक्षा के साथ साथ सामाजिक ईमानदारी भी थी इसलिए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने तथागत बुद्ध, संत कबीर और राष्ट्रपिता ज्योतिबा को अपना गुरु माना.
संत कबीर पढ़े लिखे नहीं थे विद्यालय में नहीं गए थे
राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले सातवीं पास थे
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर (MA., Ph.D., M.Sc., D.Sc, Barrister-at-Law, L.L.D., D.Litt)
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर इतने बड़े पढ़े लिखे, विद्वान, ज्ञानी हो कर भी तथागत बुद्ध, संत कबीर और राष्ट्रपिता ज्योतिबा को अपना गुरु माना.
उस का कारण है
Social Honesty - सामाजिक ईमानदारी
सत्य और न्याय के लिए अपना सब कुछ समर्पण करने वाला To devote all our own for Truth and Justice.
सामाजिक व्यवस्था के दोष लोगों को बताना.
लोगों को अपने मानसिक गुलामी / मानसिक बीमारी का एहसास कराना .
लोगों को मानसिक गुलामी से आजाद कराने का प्रयास कराना.
लोगों में अच्छे , सत्य, न्याय और नैतिक विचारों का प्रचार और प्रसार करना .
जो लोग सामाजिक व्यवस्था से पीड़ित और दुखी है उनको संगठित करके उनका संगठन बनाना.
संगठन के शक्ति से दोषी सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास करना.
दोषी सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करने के लिए अपना तन मन धन और जीवन समर्पित करना.
चलिए हम सब भी सामाजिक इमानदार बनने का प्रयास करें , 125 वी जयंती के दीन यही वास्तविक आदरांजलि होगी डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के लिए
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा Educate. शिक्षित करो . Organized - संगठित करो. Agitate - उद्वेलित या आंदोलित करो. |
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