कन्हैया को छेडऩा पड़ा भाजपा को भारी
बोला कन्हैया….मोदी जी मन की बात करते हैं सुनते नहीं।हमको चाहिए संघ वाद से आजादी, पूंजीवाद से आजादी, भ्रष्टïचार से आजादी‘हम भारत से आजादी नहीं, भारत में आजादी मांग रहे हैं।’‘मुख में राम, बगल में छुरी’, ‘फर्जी ट्वीट करने वाले संघी से चाहिए आजादी’
नई दिल्ली: कल रात तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया के जोशीले भाषण ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। अब भाजपा के शीर्षस्थ नेतृत्व को समझ आ रहा है कि कन्हैया को छ़ेडकर उसने कितनी बड़ी गलती की है। कन्हैया के भाषण की लोकप्रियता को देखते हुए कल से अब तक राष्टï्रीय चैनल लगातार कन्हैया के भाषण को दिखा रहे हैं। यू ट्यूब पर अब तक लाखों लोग कन्हैया के भाषण को सुन चुके हैं। सोशल मीडिया पर कन्हैया का भाषण वायरल हो गया है। जाहिर है कि मोदी सरकार के लिए रोहित की मौत के बाद छात्रों के गुस्से का यह दूसरा मामला है। जहां से उसे निपट पाना आसान नहीं लग रहा।
शुरूआती दौर में भाजपा को लगता था कि जेएनयू के भीतर लगाए गए कथित नारों से कांग्रेस और वामपंथी दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने जिस तत्परता के साथ फर्जी वीडियों के आधार पर कन्हैया को गिरफ्तार किया और बाद में खुद कहा कि कन्हैया ने नारे नहीं लगाए थे उसने देश भर में नौजवानों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। देश द्रोह के जिस आरोप में कन्हैया को लंबे समय तक जेल में रखने की तैयारी थी। वह आरोप अदालत में टिक न सके और कन्हैया जमानत पर रिहा हो गया।
तब तक भाजपा के नेताओं को अंदाजा नहीं था कि तिहाड़ जेल से निकलकर कन्हैया सीधा जेएनयू में जाकर ऐसा भाषण देगा जो उनके यह मुसीबत का सबब बन जाएगा। मोदी सरकार के लिए हैदराबाद में दलित छात्र रोहित की मौत वैसे भी गले की फांस बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के लखनऊ दौरे के समय अंबेडकर विश्वविद्यालय में रोहित की मौत को लेकर उनके खिलाफ नारेबाजी भी हो चुकी है। दलित वोटो को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा रोहित की मौत का मामला जल्दी से जल्दी खत्म करना चाह रही है।
मगर कन्हैया भी अब राजनीति के दांव पेच समझ गया है। उसने जेएनयू पहुंचकर आरोप लगाया कि रोहित की मौत के सच को छुपाने के लिए जेएनयू को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची गई। कन्हैया ने संघ को भी नहीं बख्शा और गोलवलकर तथा संघ की काली टोपी पर भी निशाना साधा। कन्हैया ने पीएम मोदी पर आरोपों की झड़ी लगा दी। अगर यह मामूली भाषण होता तो शायद भाजपा के रणनीतिकारों को चिंता नहीं होती।
लेकिन यहां हालात दूसरे हैं। जेएनयू में किसी मुद्दे पर उठा विरोध पूरे देश में सुर्खियां बटोर लेता है। कन्हैया के भाषण के साथ भी यहीं हुआ विपक्ष को भी लगा कि सरकार को घेरने का इससे बढिय़ा मौका कोई दूसरा नहीं हो सकता लिहाजा केजरीवाल से लेकर दिग्विजय सिंह तक ने कन्हैया को हीरो साबित करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। जाहिर है अब जेएनयू विवाद भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बनने जा रहा है।
शुरूआती दौर में भाजपा को लगता था कि जेएनयू के भीतर लगाए गए कथित नारों से कांग्रेस और वामपंथी दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने जिस तत्परता के साथ फर्जी वीडियों के आधार पर कन्हैया को गिरफ्तार किया और बाद में खुद कहा कि कन्हैया ने नारे नहीं लगाए थे उसने देश भर में नौजवानों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। देश द्रोह के जिस आरोप में कन्हैया को लंबे समय तक जेल में रखने की तैयारी थी। वह आरोप अदालत में टिक न सके और कन्हैया जमानत पर रिहा हो गया।
तब तक भाजपा के नेताओं को अंदाजा नहीं था कि तिहाड़ जेल से निकलकर कन्हैया सीधा जेएनयू में जाकर ऐसा भाषण देगा जो उनके यह मुसीबत का सबब बन जाएगा। मोदी सरकार के लिए हैदराबाद में दलित छात्र रोहित की मौत वैसे भी गले की फांस बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी के लखनऊ दौरे के समय अंबेडकर विश्वविद्यालय में रोहित की मौत को लेकर उनके खिलाफ नारेबाजी भी हो चुकी है। दलित वोटो को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा रोहित की मौत का मामला जल्दी से जल्दी खत्म करना चाह रही है।
मगर कन्हैया भी अब राजनीति के दांव पेच समझ गया है। उसने जेएनयू पहुंचकर आरोप लगाया कि रोहित की मौत के सच को छुपाने के लिए जेएनयू को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची गई। कन्हैया ने संघ को भी नहीं बख्शा और गोलवलकर तथा संघ की काली टोपी पर भी निशाना साधा। कन्हैया ने पीएम मोदी पर आरोपों की झड़ी लगा दी। अगर यह मामूली भाषण होता तो शायद भाजपा के रणनीतिकारों को चिंता नहीं होती।
लेकिन यहां हालात दूसरे हैं। जेएनयू में किसी मुद्दे पर उठा विरोध पूरे देश में सुर्खियां बटोर लेता है। कन्हैया के भाषण के साथ भी यहीं हुआ विपक्ष को भी लगा कि सरकार को घेरने का इससे बढिय़ा मौका कोई दूसरा नहीं हो सकता लिहाजा केजरीवाल से लेकर दिग्विजय सिंह तक ने कन्हैया को हीरो साबित करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। जाहिर है अब जेएनयू विवाद भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बनने जा रहा है।
कन्हैया के भाषण के अंश:जेएनयू में कब क्या हुआ
11 फरवरी- भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में छात्रों के खिलाफ एफआईआर
12 फरवरी- जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार गिरफ्तार
14 फरवरी- दिल्ली पुलिस का दावा कन्हैया के खिलाफ पर्याप्त सबूत
15 फरवरी- पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में कन्हैया की पिटाई
17 फरवरी- पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों, छात्रों की वकीलों ने की पिटाई
18 फरवरी- सुप्रीम कोर्ट: जमानत के लिए हाईकोर्ट जाए
दो मार्च- कन्हैया को अंतरिम जमानत
12 फरवरी- जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार गिरफ्तार
14 फरवरी- दिल्ली पुलिस का दावा कन्हैया के खिलाफ पर्याप्त सबूत
15 फरवरी- पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में कन्हैया की पिटाई
17 फरवरी- पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों, छात्रों की वकीलों ने की पिटाई
18 फरवरी- सुप्रीम कोर्ट: जमानत के लिए हाईकोर्ट जाए
दो मार्च- कन्हैया को अंतरिम जमानत

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