वे गऱीब हार नहीं मानते
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‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’, ‘मैला आंचल’, ‘परती परिकथा’ जैसी कृतियों के शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों के पात्र ग़रीबी, अभाव, संत्रास, भुखमरी व प्राकृतिक विपत्तियों से जूझते हुए मर तो सकते हैं, लेकिन परिस्थितियों से हार नहीं मानते।
आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप, अच्छे आदमी, ठुमरी, अगिनखोर, आदि प्रसिद्ध कहानियाँ हर बार जैसे नयी बात कह जाती हैं ।
आंचलिकता और स्थानीय बोध के अमर रचनाकार रेणु को उनके जन्मदिन (4 मार्च) पर हम शिद्दत से याद कर लें नमन कर लें !

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