Saturday, March 5, 2016

Raja Bahuguna 15 hrs · एक फर्जी ट्वीट पर देश को हेड डाउन करने के बाद ,राजनाथ सिंह का जेएनयू प्रकरण पर सब कुछ दिल्ली पुलिस पर छोड, पल्ला झाड लेना-अपनी नैतिक जिम्मेदारी से मुंह चुराना है ? गृहमंत्री पद से इस्तीफा वो देंगे नहीं।वे पहले ही कह चुके हैं कि उनके यहां इस्तीफे नहीं दिए जाते हैं।यह कैसा नैतिक बल है ? पीएम ने स्मृति ईरानी के रोहित प्रकरण पर संसद में पेश किए गए झूठ के पुलिन्दे पर "सत्यमेव जयते"ट्वीट करना मुनासिब समझा,लेकिन जब वे संसद से मुखातिब हुए तो रोहित-जेएनयू प्रकरण एक शब्द नहीं बोले।एकदम स्किप कर गए।यह कैसा अभिमान है ?अंततः एक युवा जिसे मोदी-राजनाथ की सरकार ने देशद्रोह के आरोप में निरूद्ध कर दिया है-उसके बारे में चारों ओर से,देश-दुनिया से यह आवाज आ रही है कि, उसने बडे ही तार्किक ढंग से देश में उठी बहस पर अपने विचार रख राजनीतिक विमर्श को सकारात्मक दिशा दी है और पूरे भारत का प्रतिनिधित्व किया है।दिलचस्प बात यह है कि संघ प्रुमुख ने कन्हैया कुमार को चूहा कहा है।यह संघ की जर्बदस्त बौखलाहट का परिचायक ही तो है ?कन्हैया ने कहा कि एबीवीपी हमारी दुश्मन नहीं बल्कि राजनीतिक विरोधी है-संतुलित सोच को दर्शाता है ? विचारधारात्मक संघर्ष एचसीयू और जेएनयू के माध्यम से निकल पूरे देश को अपने दायरे में ले रहा है -यह स्वागत योग्य है।भगत सिंह-अंबेडकर के विचारों की अटूट एकता को लेकर हो रहा यह प्रयोग और युवा भारत का बढता कारवां आजाद भारत की विशिष्ट परिघटना है ?।


एक फर्जी ट्वीट पर देश को हेड डाउन करने के बाद ,राजनाथ सिंह का जेएनयू प्रकरण पर सब कुछ दिल्ली पुलिस पर छोड, पल्ला झाड लेना-अपनी नैतिक जिम्मेदारी से मुंह चुराना है ? गृहमंत्री पद से इस्तीफा वो देंगे नहीं।वे पहले ही कह चुके हैं कि उनके यहां इस्तीफे नहीं दिए जाते हैं।यह कैसा नैतिक बल है ? पीएम ने स्मृति ईरानी के रोहित प्रकरण पर संसद में पेश किए गए झूठ के पुलिन्दे पर "सत्यमेव जयते"ट्वीट करना मुनासिब समझा,लेकिन जब वे संसद से मुखातिब हुए तो रोहित-जेएनयू प्रकरण एक शब्द नहीं बोले।एकदम स्किप कर गए।यह कैसा अभिमान है ?अंततः एक युवा जिसे मोदी-राजनाथ की सरकार ने देशद्रोह के आरोप में निरूद्ध कर दिया है-उसके बारे में चारों ओर से,देश-दुनिया से यह आवाज आ रही है कि, उसने बडे ही तार्किक ढंग से देश में उठी बहस पर अपने विचार रख राजनीतिक विमर्श को सकारात्मक दिशा दी है और पूरे भारत का प्रतिनिधित्व किया है।दिलचस्प बात यह है कि संघ प्रुमुख ने कन्हैया कुमार को चूहा कहा है।यह संघ की जर्बदस्त बौखलाहट का परिचायक ही तो है ?कन्हैया ने कहा कि एबीवीपी हमारी दुश्मन नहीं बल्कि राजनीतिक विरोधी है-संतुलित सोच को दर्शाता है ? विचारधारात्मक संघर्ष एचसीयू और जेएनयू के माध्यम से निकल पूरे देश को अपने दायरे में ले रहा है -यह स्वागत योग्य है।भगत सिंह-अंबेडकर के विचारों की अटूट एकता को लेकर हो रहा यह प्रयोग और युवा भारत का बढता कारवां आजाद भारत की विशिष्ट परिघटना है ?।

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