Saturday, March 5, 2016

Nityanand Gayen 4 hrs · कितना कुछ घट चुका इस दौरान हम कुछ लोग लगातर बेचैन हैं कि कोई रात के सन्नाटे में आएगा और जिंदा जला देगा हमें एक घर से फैलती हुई आग ले लेगी पूरी बस्ती को अपने चपेट में मैं लगातर उस डरे हुए व्यक्ति की तरह सोच रहा हूँ जो मरणासन है और जल्दी -जल्दी लिख लेना चाहता है अपनी वसीहत ताकि उसकी मृत्यु से पहले सुरक्षित हाथों में पहुँच जाये उसकी उम्र भर की कमाई जब मैं यह सब कुछ सोच रहा हूँ ठीक उसी समय मेरे बगल वाले मकान में बज रहा है डीजे फूल वालूम में रात के इस पहर में मैं अखबारों की शुर्खियों की कतरन कर रहा हूँ जिनमें फांसी में लटक रहा है एक नौजवान एक किसान खोज रहा है कीटनाशक की बोतल पीने के लिए एक मंत्री कह रहा है - तुम सब देशद्रोही हो | आग की लपटों की तस्वीरें अखबार के मुख्य पृष्ठ पर हैं पर सुरक्षित है अख़बार चलो कुछ तो बचा हुआ है इस आग से मैं खुद को भरोसा दे रहा हूँ कि यह आग अब कैद हो चुकी है टीवी और अखबारों में शायद इसी कारण मेरे पड़ोस में लोग ख़ुशी से डैक बजा रहे हैं ...! -नित्यानंद गायेन


कितना कुछ घट चुका इस दौरान
हम कुछ लोग लगातर बेचैन हैं
कि कोई रात के सन्नाटे में आएगा
और जिंदा जला देगा हमें
एक घर से फैलती हुई आग ले लेगी 
पूरी बस्ती को अपने चपेट में
मैं लगातर उस डरे हुए व्यक्ति की तरह सोच रहा हूँ
जो मरणासन है
और जल्दी -जल्दी लिख लेना चाहता है अपनी वसीहत
ताकि उसकी मृत्यु से पहले
सुरक्षित हाथों में पहुँच जाये
उसकी उम्र भर की कमाई
जब मैं यह सब कुछ सोच रहा हूँ
ठीक उसी समय मेरे बगल वाले मकान में
बज रहा है डीजे फूल वालूम में
रात के इस पहर में
मैं अखबारों की शुर्खियों की कतरन कर रहा हूँ
जिनमें फांसी में लटक रहा है एक नौजवान
एक किसान खोज रहा है
कीटनाशक की बोतल
पीने के लिए
एक मंत्री कह रहा है - तुम सब देशद्रोही हो |
आग की लपटों की तस्वीरें अखबार के मुख्य पृष्ठ पर हैं
पर सुरक्षित है अख़बार
चलो कुछ तो बचा हुआ है इस आग से
मैं खुद को भरोसा दे रहा हूँ
कि यह आग अब कैद हो चुकी है
टीवी और अखबारों में
शायद इसी कारण
मेरे पड़ोस में
लोग ख़ुशी से डैक बजा रहे हैं ...!
-नित्यानंद गायेन

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