Kamal Joshi
सब पढ़े, सब बढ़ें.......!लड़कियों को स्कूल में भेजने की मुहीम रंग ला ही रही है, ये बात अलग है की बेहतर पढाई की आस में लड़कों को पब्लिक स्कूल में भेजा जा रहा है. इस लिए सरकारी स्कूलों में लडकियां ज्यादा दिखाई देती हैं.
सरकारी स्कूलों का आलम ये है की वहाँ बेसिक जरुरत भी उपलब्ध नहीं. चार पांच कक्षाओं के लिए सिर्फ एक टीचर.! वो पढाये कि नवाचार करे कि कागज़ पत्तर दुरुस्त रखे.
स्कूल में सफाई से लेकर पानी लाने का काम मजबूरी से बच्चो से ही कराया जा सकता है.
जो टीचर जागरूक नहीं हैं वे ये काम सिर्फ लड़कियों से ही कराते है क्यों कि वे समझते हैं ये औरताना काम हैं...
जहां टीचर जागरूक वहीं वहाँ ऐसा नहीं...पर हमारी शिक्षा व्यवस्था ने कितने जागरूक टीचर पैदा किये है..अहम् सवाल ये है...

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