Sanjeev Chandan
एम फील- पीएच डी नामांकन में आरक्षण पर गाज ( सबसे ज्यादा ओ बी सी आरक्षण प्रभावित)
एस सी- एस टी - ओ बी सी आरक्षण के खिलाफ षड्यंत्र पूर्वक तैयार नीचे के रिजल्ट को देखें. यह एक -दो विभाग का रिजल्ट है, ऐसे अनेक विभागों में यही हाल है . 100 से ज्यादा दलित-बहुजन विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं, इससे. हो भी क्यों न जब कुलपति-प्रतिकुलपति और रजिस्ट्रार आदि सारे मिश्रा जी हों और कुलपति महोदय के रिश्ते के दामाद त्रिपाठी जी परीक्षा विभाग में बैठे हों. ( मामला महात्मागांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का है)
क्या है घपला:
तस्वीर में रिजल्ट देखें, जो राल नंबर आपको ओ बी सी सूचि में दिखेंगे, वही जेनरल में भी, ऐसा ही एस सी कैटगरी के साथ है. जबकि होना यह चाहिए था कि जो दलित-बहुजन विद्यार्थी सामान्य कोटे में चयनित हो गया, उसका नंबर अपने आरक्षित श्रेणी में नहीं होना चाहिए था, बल्कि दूसरे अन्य दलित-बहुजन विद्यार्थी का चयन आरक्षित कैटगरी में होना चाहिए था. यह आरक्षण के साथ छेड़-छाड़ का बहुत पुराना ब्राह्मणवादी तरीका है. इसमें सबसे बड़ा नुकसान ओ बी सी विद्यार्थियों को है, जो रिजल्ट से ही स्पष्ट है, प्रभावित एस सी विद्यार्थी भी हुए है.
तस्वीर में रिजल्ट देखें, जो राल नंबर आपको ओ बी सी सूचि में दिखेंगे, वही जेनरल में भी, ऐसा ही एस सी कैटगरी के साथ है. जबकि होना यह चाहिए था कि जो दलित-बहुजन विद्यार्थी सामान्य कोटे में चयनित हो गया, उसका नंबर अपने आरक्षित श्रेणी में नहीं होना चाहिए था, बल्कि दूसरे अन्य दलित-बहुजन विद्यार्थी का चयन आरक्षित कैटगरी में होना चाहिए था. यह आरक्षण के साथ छेड़-छाड़ का बहुत पुराना ब्राह्मणवादी तरीका है. इसमें सबसे बड़ा नुकसान ओ बी सी विद्यार्थियों को है, जो रिजल्ट से ही स्पष्ट है, प्रभावित एस सी विद्यार्थी भी हुए है.
सवाल है कि इसका क्या किया जाये, क्या हिन्दी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षक इस रिजल्ट के खिलाफ लड़ेंगे? मुझे लगता है, विद्यार्थी भले ही लड़ लें, लेकिन शिक्षक 'ठकुरसुहाती में ही लगे रहेंगे.'

No comments:
Post a Comment