Thursday, June 23, 2016

उसी नंदीग्राम में फिर भूमि अधिग्रहण है! जमीन आंदोलन की खिलाफत के चेहरे सिदिकुल्ला, रेज्जाक मोल्ला और शुभेंदु अब मंत्री हैं तो विरोध की गुंजाइश कम है! संघ परिवार से अब कोई लड़ाई नहीं है बल्कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर बंगाल का विकास थीमसांग है। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप

उसी  नंदीग्राम में फिर भूमि अधिग्रहण है!
जमीन आंदोलन की खिलाफत के चेहरे सिदिकुल्ला, रेज्जाक मोल्ला और शुभेंदु अब मंत्री हैं तो विरोध की गुंजाइश कम है!


संघ परिवार से अब कोई लड़ाई नहीं है बल्कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर बंगाल का विकास थीमसांग है।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
हस्तक्षेप
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी इन दिनों खिली खिली हैं।पराजित मंत्रियों और नेताओं का यथोचित पुनर्वास कर देने के साथ साथ पार्टी की कमान मजबूती से थामते हुए वे चुनाव के बाद पहली बार जमीन अधिग्रहण करके उद्योग जगत की लंबित मांग पूरी करने की दिशा में बढ़ रही हैं।जिसमसे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ भूमि आंदोलन का नेतृत्व करने की वजह से वे बंगाल की मुख्यमंत्री बनी है,उसी नंदीग्राम इलाके में अब बिना प्रतिरोध भूमि अधिग्रहण की तैयारी है।


पर्यटन स्थल दीघा तक पहुंचने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग116 बी के लिए 90 किमी की दूरी तयकरने वाली सात मीटर से चौड़ी इस सड़क की चौड़ाई 14 मीटर करने के लिए जमीन ली जा रही है।नये सिरे से मुख्यमंत्री बनने के दीदी की विकास की दौड़ के लिए नंदीग्राम फिर पहला पड़ाव साबित होने जा रहा है।


उद्योग जगत को शिकायत थी कि दीदी जमीन अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं है तो विकास का रथ जमीन में ही धंसा है।नंदीग्राम से ही उस रथ को सरपट दौड़ाने की तैयारी है।दीघा को बतौर पर्यटन स्तल विकसित करके पूर्व मेदिनीपिर में विकास का राजमार्ग खोलने की यह परिकल्पना है।


नंदीग्राम और दूसरे तमाम इलाकों में मुसलमान किसानों की जमीन अंधाधुंध औद्योगीकरण और शहरीकरण के वास्ते छीनने की वजह से बंगाल में मुसलमान वाममोर्चा के खिलाफ हो गये।


वाम मोर्चा के खिलाफ लामबंद जमायत नेता सिदिकुल्ला चौधरी का दक्षिण बंगाल के मुसलमानों में बहुत घना असर है तो माकपाई किसान सभा के राष्ट्रीय नेता रेज्जाक मोल्ला भी माकपाई मंत्री होते हुए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बेहद मुखर थे।


ये दोनों अब दीदी के मंत्रिमंडल में शामिल हैं।इसके अलावा नंदीग्राम से चुनाव जीतने वाले शुभेंदु अधिकारी भी अब दीदी के मंत्री हैं।


इस भावभूमि में उसी  नंदीग्राम में फिर भूमि अधिग्रहण है।


बंगाल में ताजपोशी के बाद दीदी के लिए अब राजकाज का वक्त है।


प्रभूजी ने कोलकाता में मेट्रो नेटवर्क का काम जल्दी पूरा करने का वायदा किया है तो नई दिल्ली से कोलकाता की दूरी महज पांच घंटे में पूरी करने के लिए बुलेट ट्रेन का तोहफा भी मिलने वाला है।


संघ परिवार से अब कोई लड़ाई नहीं है बल्कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर बंगाल का विकास थीमसांग है।


संसद में दीदी मोदी के साथ हैं तो बंगाल में दीदी के राजकाज को आसान बनाने के लिए अब केंद्र सरकार साथ साथ हैं।


इस बीच नारद स्टिंग का दंश निकालने की पूरी तैयारी हो गयी है। दीदी के खास पुलिस अफसर राजीवकुमार कोलकाता में फिर बहाल हैं और नारद प्रकरण में साजिश की वे जांचभी करेंगे।कांग्रेस के साथ गठजोड़ के बाद माकपा में ऩई दिल्ली,तिरुअनंतपुरम से लेकर कोलकाता तक घमासान है और चार माकपा नेताओं ने पार्टी भी छोड़ दी है।


इस बीच बंगाल में चुनावी हिसा का सिलसिला फिलहाल थमा सा लगता है क्योंकि तय हो गया है कि दीदी को चुनौती देने वाला कोई नहीं है।


अब विपक्ष के कार्यकर्ता सत्तादल को किसी भी स्तर पर चुनौती देने की हालत में नहीं है।इस डांवाडोल में संघ परिवार ने बंगाल को जीत लेने का नया कार्यक्रम असम लाइन पर बनाया है।


अभी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक उत्पीड़न की नई वारदातों से शरणार्थी वोट बैंक पर संघ परिवार की खास नजर है और उग्र हिंदुत्व के रास्ते अगले लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाकर फिर आहिस्ते आहिस्ते बंगाल दखल करने के लिए उनकी कवायद है।फिलहाल यथासंभव केसरियाकरण जारी है।

जनता को हो नहो,सत्ता का तो केसरियाकरण हो ही गया है।

No comments:

Post a Comment