Wednesday, June 8, 2016

#sixwordstories शिल्प के इस्तेमाल के मामले में बाजार का निशाना हमेशा अचूक होता है।

#sixwordstories
Ranjit Verma

शिल्प के इस्तेमाल के मामले में बाजार का निशाना हमेशा अचूक होता है। वह आपकी तरफ चुनौती फेंकता है और फैशन के मुहावरे भी। कह सकते हो तो कहो। सिर्फ छह शब्द हैं तुम्हारे पास। और कहनी है पूरी कहानी। टेस्ट को तो भूल ही जाइये। 20-20 मैच भी नहीं है यह। सिर्फ छह गेंद में ही सारे कमाल दिखा देने हैं। कम नहीं होता छह। गब्बर ने छह में से तीन गोलियां हवा में उड़ा दी थी। उसके लिए तीन ही काफी थी। 
बाजार द्वारा गढ़े गए शिल्प की खाशियत यह होती है कि यह अपने विरोधियों को भी अपने जाल में फंसा लेता है इसलिए कि वह किसी को अपना दुश्मन मानता ही नहीं। उसका जाल सबके लिए होता है जो उसे काटने वाले होते हैं उनके लिए भी क्योंकि उसे पूरा विशवास होता है कि एक दिन वह भी फंसेगा। विरोध करता हुआ फँसेगा।
अभी एक खबर आयी थी कि मोहम्मद अली ने 132 शब्दों में डोनाल्ड ट्रम्प की धज्जियाँ उड़ा दी। इस खबर में मुख्य बात थी कि अली ने ट्रम्प की धज्जियाँ उड़ाई लेकिन बाजार ने शब्द गिनकर बताये और कइयों का दिमाग वहीं अटक गया धज्जियाँ पीछे रह गयीं। कथ्य गौण और शिल्प सामने। जबतक आप इसे समझें बाजार अपना खेल कर इसे फैशन में बदल दिया।
"मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है" इसमें कुल नौ शब्द हैं फिर छह शब्दों में कहानी क्यों। अगर इस जुमले का जवाब देना है तो नौ शब्द क्यों नहीं ?
मसऊद अख्तर ने जो सवाल पूछे हैं वह सवाल मेरा भी है कि शुरू किसने किया इसे और उसे किसने कहा ऐसा करने को।


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