Friday, July 8, 2016

रेलवे कर्मचारियों की छुट्टियों पर बैन 33 लाख केंद्रीय कर्मचारी हड़ताल करें न करें,रेलवे हडताल पर युनियनें अडिग तो उसे कुचलने की भी पूरी तैयारी एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप

रेलवे कर्मचारियों की छुट्टियों पर बैन
33 लाख केंद्रीय कर्मचारी हड़ताल करें न करें,रेलवे हडताल पर युनियनें अडिग तो उसे कुचलने की भी पूरी तैयारी

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
हस्तक्षेप
7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से नाराज देश के करीब 33 लाख केंद्रीय कर्मचारी 11 जुलाई को हड़ताल नहीं करेंगे।या यूनियनों के दावे के मुताबिक हड़ताल होकर रहेगी,अबी कहना मुश्किल है।देशव्यापी रेलवे हड़ताल टालने की सरकारी तरफ से पूरी तैयारी है और यूनियनों की एकता में सीधे फूट दीख रही है।दूसरी तरफ श्रम कानूनों में हुए संशोधन के तहत सरकार हड़ताली कर्मचारियों से निबटने के लिए चाकचौबंद इंतजाम कर रही है।यूनियनों से बातचीत और वायदे अपनी जगह है लेकिन जरुरत हुई तो हड़ताल कुचलने की भी तैयारी है।बहरहाल रेलवे कर्मचारी हड़चताल के फैसले पर अभीतक  अडिग है।

इसी बीच सरकार के आश्वासन पर केंद्रीय कर्मचारियों की यूनियनों की राष्‍ट्रीय संयुक्‍त कार्य परिषद के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा ने कहा है कि ने बताया कि हमने अपनी हड़ताल चार महीने के लिए टाल दिया क्‍योंकि सरकार ने हमें आश्‍वस्‍त किया है वो हमारे उठाए मुद्दों पर विचार करेगी।
दूसरी तरफ,मोदी सरकार भले ही सातवें वेतन आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात बता रही हो, लेकिन रेलवे कर्मचारी इससे खुश नहीं हैं। खासतौर पर न्यूनतम वेतन सीमा के मुद्दे पर सरकार और रेलवे यूनियन में ठन गई है। दरअसल, रेलवे कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि रेल यूनियन की इस मामले में की गई किसी भी सिफारिश पर सरकार ने गौर नहीं किया।



एक तरफ रेल मंत्रालय पर सातवें पे कमीशन की वजह से 31000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ का दबाव है, तो दूसरी तरफ रेलवे यूनियन की तरफ से हड़ताल की धमकी का भी। सातवें वेतनमान से नाराज कर्मचारियों ने जहां हड़ताल पर जाने की घोषण की है, वहीं रेलवे ने कर्मचारियों की छुट्टियों पर बैन लगा दिया है और कर्मचारियों को चेतावनी जारी की है। इधर, रेलवे कर्मचारियों ने भी हड़ताल को सफल बनाने के लिए आंदोलन तेज कर दिया है।

यूनियनों की सबसे बड़ी नाराजगी न्यूनतम वेतन को लेकर है। उन्होंने न्यूनतम वेतन 26000 रुपये करने की मांग की थी, जबकि सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन 18000 रुपये किया गया है। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस में की गई कटौती भी कर्मचारियों को रास नहीं आ रही है।

रेलवे हड़ताल से निबटने की पूरी तैयारी है और आंदोलन को लेकर रेल मंत्रालय ने सभी जोनल अधिकारियों को पत्र लिखा है। इसमें किसी भी रेल कर्मचारियों को 11 जुलाई से अवकाश न दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने यूनियनों से बात की है। लेकिन यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार न्यूनतम वेतन के मुद्दे पर बीच का रास्ता निकालती है तो वो सरकार का साथ देंगे, नहीं तो हड़ताल पर जाएंगे।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में खामियों, भत्तों में कटौती और न्यू पेंशन स्कीम के खिलाफ 11 जुलाई की प्रस्तावित हड़ताल को रेलवे ने अवैध घोषित कर दिया। इसके तहत रेलवे बोर्ड ने सात जुलाई के बाद कर्मचारियों को लंबी छुट्टी नहीं देने का आदेश जारी किया है। सूत्रों के अनुसार हड़ताल के कारण काम प्रभावित होने पर दोषियों पर केस भी दर्ज हो सकता है। इसमें दो वर्ष की सजा का प्रावधान है।

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