Friday, July 8, 2016

सिर्फ जाकिर पर प्रतिबंध क्यों लगे? साथ में जितने भी साधु बाबा लोग हैं, इन सबका टीवी प्रसारण बंद होना चाहिए. ये सब अंधविश्वास, पिछड़ापन, अवैज्ञानिकता और वैमनस्य सिखाते हैं.

Gopal Rathi
मत - विमत
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जाकिर नाईक के कई भाषण सुने. मैं उनपर प्रतिबंध का समर्थन करूंगा. जाकिर धर्म के बहाने राजनीतिक भाषण देते हैं. वे अभी मध्ययुग में जी रहे हैं और वहीं सबको ले जाना चाहते हैं. मुझे अपने धर्म को अच्छा कहने का हक है, लेकिन बाकी धर्म के मानने वालों को विधर्मी कहने का हक नहीं है. या तो सभी धर्म सम्माननीय हैं, या फिर कोई नहीं है. लेकिन सिर्फ जाकिर पर प्रतिबंध क्यों लगे? साथ में जितने भी साधु बाबा लोग हैं, इन सबका टीवी प्रसारण बंद होना चाहिए. ये सब अंधविश्वास, पिछड़ापन, अवैज्ञानिकता और वैमनस्य सिखाते हैं.
(कृष्णकान्त Krishna Kant )
बांग्लादेश का एक दहशतगर्द मरते-मरते कह गया कि उसकी प्रेरणा इस्लाम-प्रचारक डॉ ज़ाकिर नाइक रहे हैं। मरते-फँसते कई गुनहगार अपने गुनाहों की प्रेरणा का स्रोत ख़ास फ़िल्मों या अदाकारों को भी बता जाते हैं। प्रेरणा देना एक बात होती है, प्रेरणा लेना दूसरी। फ़िल्मों की बात और है, अब दहशत के मामले में अपनी एजेंसियों से न सही, बांग्लादेश से मिली 'जानकारी' से शासन लगता है जाग गया है। मगर क्या वाक़ई?
ज़ाकिर नाइक से तो ख़ुद मुसलिम संगठन छड़क खाते रहे हैं, दारुल उलूम देवबंद ने फ़तवा तक जारी किया था। फिर भी, ज़ाकिर समुदायों में आग लगा रहे हों तो इसकी कड़ी सज़ा मुक़र्रर होनी चाहिए। पर बोलने में उनसे ज़्यादा उत्तेजक क्या उवैसी बिरादरान नहीं हैं? और साध्वी निरंजन ज्योति, साध्वी प्राची, साक्षी महाराज, योगी आदित्यनाथ, संजीव बालयान, गिरिराज सिंह, संगीत सोम, ज्ञानदेव आहूजा आदि के बारे में क्या ख़याल है? उन्हें बोलने की इतनी आज़ादी क्यों?
(ओम थानवी Om Thanvi)
जाकिर नाईक के भाषणों (प्रवचनों) की जाँच का आदेश महाराष्ट्र सरकार ने दे दिया है।
तमाम योगियों, साध्वियों, शंकराचार्यों, बाबाओं, महाबाबाओं, संतों, महासंतों, निराशारामों वगैरा वगैरा के भाषणों, प्रवचनों, पुस्तिकाओं की जाँच के आदेश भी साथ के साथ दे दिए जाते तो बेहतर था। इस से सरकार की निष्पक्षता भी बनी रहती। जाँच रिपोर्ट तो जो तय कर रखी है वही देनी है।
(दिनेशराय द्विवेदी)

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