Mithilesh Priyadarshy
तस्वीर में जाड़े का भान करवाते शख़्स कोई लठैत या छुटभैया नेता नहीं हैं, पटना आर्ट कॉलेज के प्रिंसिपल साब हैं, जिनके बारे में विद्यार्थियों का कहना है, इनका कला से उतना ही नाता है जितना बंदर का पोरबंदर से.
कला की बुनियाद पर खड़े इस कॉलेज में कला की वापसी के लिए विद्यार्थी लम्बे समय से कला का एक आदमी चाहते थे. साथ ही चाहते थे कि कॉलेज में कला की उच्च शिक्षा की भी शुरूआत हो. विद्यार्थियों के बीच ये मांगें उठती रहती थीं.
इसी बीच एक घटना घट गयी. कॉलेज में काम करने वाले एक ठेकेदार ने एक विद्यार्थी को पीट दिया. प्रिंसिपल साब ने ठेकेदार पर कार्रवाई करने की बज़ाय विरोध दर्ज करने वाले आठ विद्यार्थियों पर न केवल मुक़दमा लिखवा दिया बल्कि उन्हें निलंबित भी कर दिया. बस तब से विद्यार्थी सड़कों पर हैं. प्रिंसिपल की बर्खास्तगी और निलंबन वापसी के लिए कई मोर्चे निकाले गए, धरने पड़े और जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो 8 विद्यार्थी भूख हड़ताल पर बैठ गए. भूख हड़ताल को अब ग्यारहवां दिन लगेगा. भूख अपना काम कर रही है, विद्यार्थी अपना. लेकिन इस बीच सबकुछ जस का तस है. हाँ, नारा वही है, दशरथ मांझी वाला, 'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं.'







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