Tuesday, May 10, 2016

छत्तीसगढ़ में पुलिसिया दमन के खिलाफ दिल्ली आ कर आज धरने पर बैठे पत्रकारों को दिल्ली के पत्रकारों ने निराश किया। धरने में दिल्ली के बामुश्किल एक—दो पत्रकार ही पहुंचे। पत्रकार Ajay Prakash और सामाजिक कार्यकर्ता Himanshu Kumar की उपस्थिति ने लोगों का हौसला बढाया। अजय प्रकाश ने बताया कि सन् 2006 से ही छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं और वहां सवाल पूछना ही जुर्म बन गया है। हालात यह हैं कि सिपाही, जज और अधिकारी या नेता सब एक ही भाषा बोलते हैं। आए दिन पत्रकारों की गिरफ्तारी हो रही है। उन्हे धमकाया जा रहा है। पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ के कमल शुक्ला ने बताया कि धरने पर आ रहे अन्य 34 पत्रकारों को विभिन्न माध्यमों से धमकाया गया जिसके चलते वे दिल्ली नहीं पहुंच सके।

छत्तीसगढ़ में पुलिसिया दमन के खिलाफ दिल्ली आ कर आज धरने पर बैठे पत्रकारों को दिल्ली के पत्रकारों ने निराश किया। धरने में दिल्ली के बामुश्किल एक—दो पत्रकार ही पहुंचे। पत्रकार Ajay Prakash और सामाजिक कार्यकर्ता Himanshu Kumar की उपस्थिति ने लोगों का हौसला बढाया। अजय प्रकाश ने बताया कि सन् 2006 से ही छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं और वहां सवाल पूछना ही जुर्म बन गया है। हालात यह हैं कि सिपाही, जज और अधिकारी या नेता सब एक ही भाषा बोलते हैं। आए दिन पत्रकारों की गिरफ्तारी हो रही है। उन्हे धमकाया जा रहा है। 
पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ के कमल शुक्ला ने बताया कि धरने पर आ रहे अन्य 34 पत्रकारों को विभिन्न माध्यमों से धमकाया गया जिसके चलते वे दिल्ली नहीं पहुंच सके।







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