Wednesday, May 18, 2016

जॉन स्टुअर्ट मिल :स्त्रियों की पराधीनता नूतन यादव

जॉन स्टुअर्ट मिल :स्त्रियों की पराधीनता
नूतन यादव
"महिलाओं के स्वभाव को लेकर व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित बिना किसी दर्शन या विश्लेषण के जो भी पहले उदहारण मिले उन्हीं के आधार पर इतने हास्यास्पद मत बना लिए जाते है कि इसका लोकप्रिय विचार हर देश में उस देश के विचारों व महिलाओं के विकास अथवा अविकास की सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बदल जाता है ।एक पूर्वी विचारक सोचता है कि महिलाएँ स्वभाव से विशेषतः कामुक होती हैं : हिन्दू लेखन में इसी आधार पर उनके उग्र अपमान को देखें। एक अंग्रेज प्रायः सोचता है कि स्त्रियाँ स्वभावतः ठंडी और भावनाहीन होती है। महिलाओं की चंचलता के बारे में कहावतें अधिकतर फ्रांसीसी मूल की है;फ्रांसिस प्रथम की प्रसिद्ध उपाधि से लेकर उससे ऊपर तथा नीचे तक ।इंग्लैंड में यह टिपण्णी आम इस्तेमाल होती है,महिलाएँ पुरूषों से कितनी ज्यादा स्थिर है। फ़्रांस की अपेक्षा इंग्लैंड महिलाओं की अपकीर्ति अस्थिरता को लेकर अधिक हुई है :और साथ ही अंग्रेज महिलाएँ अपने अंतरतम स्वाभाव से विचारों के समक्ष अपेक्षाकृत अधिक झुक जाती है .............................................
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मिल साहब, आज अगर आप जीवित होते तो ये देखकर बहुत हैरान होते कि आपके विचारों को हम कितनी शिद्दत से बन्दर के मरे बच्चे की तरह छाती से चिपकाए हुए जी रहे हैं। अपने जीवन काल में जो बातें और विचार आपको हास्यास्पद लगते थे वे आज भी हमारे समाज का मनोरंजन कर रही है। महिलाओं पर कहे हुए चुट्कुलें ,मजाक , गालियाँ आज भी पुरुषवादी समाज को हँसने का मौका प्रदान करती है। क्या पूर्वी क्या पश्चिमी दोनों ही समाजों की आपने सही खाल खिंची थी
। हम ठंडी है या भावनाहीन, कामुक है या चंचल ,कितनी स्थिर है कितनी अस्थिर ......ये हमारा पुरुष समाज ही तय करता है ।हमें कहाँ अपनी भावनाओं को दिखाना है? कितना दिखाना है? कितनाछुपाना है? सब उनके द्वारा ही तय किया जाता है ।...
नोट : अब बस बहुत हुआ ...... हमारी मानसिक शक्तियों और क्षमताओं का मूल्यांकन बंद करें .... हमारे चरित्र का निर्माण हम स्वयं कर लेंगे .....

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