Wednesday, May 18, 2016

राहुल सांकृत्‍यायन की पुस्‍तक 'किन्‍नर देश' से----

राहुल सांकृत्‍यायन की पुस्‍तक 'किन्‍नर देश' से----

''किन्‍नर या किंपुरूष देवयोनि हैं। उनके देश की यात्रा का अर्थ है, देव लोक में जाना। किन्‍नर देश हिमाचल का एक रमणीय भाग है। किन्‍नर मूल शब्‍द है जो किन्‍नौर बन गया है। संस्‍कृत में किन्‍नर के लिए किंपुरूष भी प्रयोग होता है। जैसे भी हो आधुनिक 'कन्‍नौर' किन्‍नर शब्‍द का अपभ्रंश है और किसी समय किंपुरूष वर्ष प्राय सारे हिमालय का नाम रहा होगा।''
(उन्‍होंने यह पुस्‍तक 'थर्ड जैंडर' पर तो नहीं लिखी है--शब्‍द के इस्‍तेमाल के गलत प्रचलनभविष्‍य में इसी 'किन्‍नर देश' को 'थर्ड जैंडर' का देश कहेंगे), दो उदाहरण आपके सामने। पहला यह कि किन्‍नौर के न्‍यायविद एच जे एस- डीएस गोलदार नेगी की पिछले साल 'किन्‍नौर-आदिवासी संस्‍कृत के आर्थिक आधार-पुस्‍तक आई तो एक न्‍यूज पेपर ने लिखा ''गोददार नेगी हिजड़ा समुदाय के ऐसे किन्‍नर हैं जिनकी लम्‍बी साधना के बाद पुस्‍तक आई है।'' वे बेचारे इतने परेशान हो गए कि अखबार वालों ने क्षमा न मांगी होती तो मामला उच्‍च न्‍यायालय में चला गया होता।'' दूसरा उदाहरण कि जब से यह शब्‍द इस अर्थ में प्रयुक्‍त होने लगा, जेएनयू के तीन छात्रों ने 'किन्‍नर लोक साहित्‍य'', '' किन्‍नर देश का समाज'' और ''किन्‍नर लोक साहित्‍य में सामाजिक व आर्थिक संरचना'', विषयों को लेकर एमफिल व पीएचडी कर रहे थे, लेकिन वे जब भी जिक्र करते तो लोग उनका मजाक उडाते, सहयोग कोई नहीं करता कि उन्‍हें 'किन्‍नरों' के सिवा और विषय नहीं मिला। और उन तीनों छात्रों को विषय बदलने पडे। कहने का तात्‍पर्य यह है कि जब यह शब्‍द 'किन्‍नर' हिमाचल के प्रागैतिहासिक देश ''किन्‍नर देश' से उपजा है और वर्तमान में किन्‍नर हिमाचल की जनजाति है तो इस विषय को विनम्रता से उठाना बुरा नहीं है। जो हमारे साथ हैं उन्‍हें एक'एक पत्र जरूर प्रधान मंत्री और मुख्‍यमंत्री को लिखना चाहिए कि इसका समाधान निकाला जाए-----बजाए कि मुझे आप गालियां दें या किन्‍नर का अर्थ समझाने लगे। विनम्र अपील है आप सभी से-------
Harnot SR Harnot

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