Wednesday, May 18, 2016

Neeraj Bauddh भेदभाव तो इनके साथ भी हुआ है, परंतु उसके लिखित परीक्षा में अधिक अंतराल होने से नीचे गिराया नहीं जा सका, तभी तो टीना को 195 अंक और लिखित में बहुत कम अंक आने वाले सवर्ण को 210 अंक, यह भेदभाव ही तो है। और आज जब टीना ने टॉप कर लिया तो सवर्ण लेखक एव लोग इतने फ्रस्टेड हो गए हैं कि टीना को साहू-फुले-आंबेडकर की विचारधारा से दूर कर रहे हैं, यह बता-बता कर कि तुम दलित नहीं हो, तुम्हारे साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है तो फिर टॉपर को 278 में 195 अंक क्यों, 210 से अधिक क्यों नहीं ?

Neeraj Bauddh
भेदभाव तो इनके साथ भी हुआ है, परंतु उसके लिखित परीक्षा में अधिक अंतराल होने से नीचे गिराया नहीं जा सका, तभी तो टीना को 195 अंक और लिखित में बहुत कम अंक आने वाले सवर्ण को 210 अंक, यह भेदभाव ही तो है। और आज जब टीना ने टॉप कर लिया तो सवर्ण लेखक एव लोग इतने फ्रस्टेड हो गए हैं कि टीना को साहू-फुले-आंबेडकर की विचारधारा से दूर कर रहे हैं, यह बता-बता कर कि तुम दलित नहीं हो, तुम्हारे साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है तो फिर टॉपर को 278 में 195 अंक क्यों, 210 से अधिक क्यों नहीं ?

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