O.p. Pandey
उत्तराखण्ड वाकई अपन लोगो के लिए वैसा ही है जो हम आप चाहते थे ? हम चहुओर लूटने को ही बने हों जैसे ?नमस्कार मित्रो
कल प्रातः अपनी बहन बहनोई को बरेली पहुचाने गया था बहेड़ी से कुछ दूर आटामाडा के पास मंगलवार को सब्जी की बाजार थी हफ्ते में दो दिन लगने वाले इस हॉट से जब जीजाजी ने कुछ फल सब्जी खरीदने को रुकवाया मै भी उनके साथ हो लिया , जिंदगी में पहली बार यह अहसास हुआ कि हम तो उत्तराखंड के ठगों के बीच ठगे गए है आप अगर सब्जी फलो के रेट में अंतर सुने तो हैरान ही नहीं खुद को ठगा पायेगे ।
हल्द्वानी बहुत बड़ी मंडी मानी जाती है और अपन लोग तो यहाँ लूट रहे है हलद्वानी में आप जो खीरा बीस से चालीस रुपया खरीद रहे है वह वहाँ दस रुपए से बीस रूपये प्याज यहाँ बीस रूपये किलो से कम नहीं वहाँ खुले दस रूपये केला चित्तीदार तीस रूपये वह भी बड़ा साइज , यहाँ तो केला आप चित्तीदार तो छोड़ दें कार्पेट से पकाया गया चालीस रूपये से कम ? आप खुद ही सोच लीजिये ? कागजी नीबू आप हल्द्वानी में अस्सी रूपये खरीद रहे है वहाँ पचास रूपये में खुद बिन लें ,
आप आलू की सबसे बड़ी मंडी के नाक तले बैठे हैं और वही आलू जो हलद्वानी से ही वहाँ ले जाया गया है दस रूपये किलो बिक रहा है ?
सब्जी बेचने वाले वसीम से पूछने पर वह कहता है हम अधिकतर माल हल्द्वानी से ही लाते हैं और बताता है कि कुछ साल पहले वह हलद्वानी के मुखानी में सब्जी का ठेला लगाता था पारिवारिक कारणों से उसे घर आना पड़ा अब यही काम करता है वसीम कहता है हलद्वानी में सब्जी फल का मुनाफा बहुत अच्छा है ज्यादातर सब्जी वाले आढ़ती का माल बेचते हैं रेट बेचने के तय हो जाते है अगर किसी फल सब्जी का रेट पचास है तो सभी उसी रेट बेचते हैं तभी उसका मुनाफा अच्छा मिल जाता है जबकि वहाँ वह बहुत कम मुनाफे पर काम करता है कहता है हल्द्वानी में लोग मोलभाव कम करते है यहाँ तो मंडी रेट से दुकानदार का मुनाफा खरीददार खुद तय कर पैसे देता है । एक बात जो वह कहता है गौर फरमाने लायक है उसने बताया कि हल्द्वानी में पुलिस वालो को उसे कई बार फल सब्जिया मुफ़्त देनी पड़ी वहाँ पुलिस भी पचास रूपये से कम में नहीं मानती जबकि यूपी पुलिस वही काम दस रूपये में कर देती है मेरे कान खड़े हो गए ये क्या देवभूमि की पुलिस भी महंगी ?
वापसी में दो चार दिन की सब्जी खरीद लाया हूँ मन ही मन रस्ते सोचता रहा उत्तराखण्ड वाकई अपन लोगो के लिए वैसा ही है जो हम आप चाहते थे ? हम चहुओर लूटने को ही बने हों जैसे ?
क्या करें आम गरीब हर कोई दूने रेट पर ही खरीदने पर मजबूर है ? वसीम की एक बात अभी तक कानो में है कहता है कम मुनाफे पर भी खुश हूँ भाईजान भला अपने लोगों की जेब काट अपनी भरना भी तो चोरी है ?
भई अल्लाह को भी जबाब देना है कहता है एक बार उसे उलटी दस्त हुए हल्द्वानी हॉस्पिटल भर्ती हुआ तीन हजार भरे , दुखी मन से कहता है यही काम बरेली के किसी भी उस जैसे अस्पताल में एक हजार में हो जाय उसे दुःख है कहता है हल्द्वानी मे गरीब इलाज नहीं करवा सकता ?
देर हो रही थी बाते बहुत करनी थी फिर भी जल्द पूछ लिए कि यूपी और अपने उत्तराखड में कहाँ बेहतर लगा ? उसके उत्तर से मै बिचलित हूँ आप भी हो ही जाएंगे ...
उसने कहा कि यूपी के नेता उत्तराखडी नेताओ से कम
खाऊ पीउ है और पुलिस भी ......
मैंने फिर पूछ लिया लोग ..?
उत्तर मिला लोग तो सभी एक ही जैसे होते है भाईजान
कुछ आप और हम जैसे ... दुआ सलाम कर एक हफ्ते की सस्ती सब्जी ले हल्द्वानी लौट आया हूँ नमस्कार


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